परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता: बशीर बद्र की ग़ज़ल
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम ...
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम ...
वफ़ा और बेवफ़ाई वो दो चीज़ें हैं, जिनसे उर्दू शायरी को खाद-पानी मिलता है. इन्हीं दोनों के इर्द-गिर्द सिमटी यह ...
स्त्रियों का लिखा उनका स्वयं का भोगा गया दुख होता है. क्यों उनकी लिखी पंक्तियों को सीरियसली लेना चाहिए, बता ...
कहते हैं बुढ़ापा भी एक तरह का बचपना होता है. पिता के चश्मे को माध्यम बनाकर लिखी गई यह कविता ...
उर्दू शायरियां न केवल शब्दों की ख़ूबसूरती और अपनी तहजीब के लिए जानी जाती हैं, पर उनमें छोटी-छोटी सलाहतें भी ...
जो जैसा दिखता है वह होता नहीं, दुनिया के कई-कई चेहरे और चरित्र हैं. राहत इंदौरी की यह ग़ज़ल दुनिया ...
अच्छे दिनों का बेसब्री से इंतज़ार करती गोपालदास सक्सेना नीरज की यह कविता आपको एक साथ हालात के सकारात्मक और ...
जहां विडंबना है, विरोधाभास है, वहां कविता है. कृषि प्रधान देश भारत में कृषकों की हालत को बयां करती अरुण ...
किसी भी भाषा की समृद्धि उसके साहित्य को समृद्ध करती है. पर प्यार करने के लिए भाषा की समृद्धि नहीं ...
सपने आने का समाजविज्ञान क्रांतिकारी कवि पाश की यह छोटी-सी कविता बख़ूबी बयां करती है. हर किसी को नहीं आते ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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