Tag: कवि क़ैसर-उल ज़ाफ़री

बस्ती में है वो सन्नाटा जंगल मात लगे: क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर

बस्ती में है वो सन्नाटा जंगल मात लगे: क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर

क़ैसर-उल ज़ाफ़री की यह शायरी प्रतीकों और विरोधाभासों के साथ ख़ूबसूरती से खेलते हुए सीधे दिल में उतर जाती है. ...

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे: क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे: क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर

प्यार, वफ़ा, बेवफ़ाई और अकेलेपन को बयां करते क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर, पढ़कर बरबस मुंह से ‘वाह, वाह’ ज़रूर निकलेगा. ...

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