चढ़ा दिमाग़: कहानी मजबूरी और ग़लतफ़हमी की (लेखिका: सुभद्रा कुमारी चौहान)
बिना किसी की स्थिति जाने, उसके बारे में धारणा बना लेना बड़ा ही आसान सा काम है. कहानी चढ़ा दिमाग़ ...
बिना किसी की स्थिति जाने, उसके बारे में धारणा बना लेना बड़ा ही आसान सा काम है. कहानी चढ़ा दिमाग़ ...
एक गुरु अपनी मृत्यु के बाद वसीयत लागू कराने की ज़िम्मेदारी अपने प्रिय शिष्य को देते हैं. जानें, बीवी-बच्चों से ...
सास-बहू का रिश्ता चूहे-बिल्ली के रिश्ते से कम दिलकश नहीं होता. इनके भाग्य में पहले ही दिन से दुश्मनी लिखी ...
प्यार में हमेशा पाना ही सबकुछ नहीं होता. प्रेम में त्याग की भी अपनी जगह और ख़ूबसूरती है. यह कहानी ...
भारत के इतिहास में विभाजन वह दौर था, जब आपसी विश्वास की धज्जियां उड़ रही थीं. ख़्वाजा अहमद अब्बास की ...
यशपाल की इस कहानी की पृष्ठभूमि उस समय की है, जब भारत में बाल विवाह का प्रचलन था. फूलो पांच ...
कुछ लोग जन्मजात क्रांतिकारी होते हैं. बिना क्रांति किए उन्हें चैन नहीं पड़ता. यह कहानी एक क्रांतिकारी लड़के और उसकी ...
रेलवे के एक सहायक ‘करमा’ की ज़िंदगी का लेखा-जोखा है कहानी ‘एक आदिम रात्रि की महक’. वह कई बाबुओं के ...
एक छोटी-सी हानिरहित बात भी अगर दिमाग़ में बैठ जाए तो प्राणघातक हो सकती है. अंतोन चेखक की कहानी ‘डेथ ...
खिड़कियां न सिर्फ़ मकानों में होती हैं, बल्कि ये हमारे दिलों में भी होती हैं. कई बार कुछ खिड़कियां हमारी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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