सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा: बशीर बद्र की ग़ज़ल
भरोसा, प्यार, वफ़ा, बेवफ़ाई को एक साथ आवाज़ देती बशीर बद्र की ग़ज़ल ‘सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा’ ...
भरोसा, प्यार, वफ़ा, बेवफ़ाई को एक साथ आवाज़ देती बशीर बद्र की ग़ज़ल ‘सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा’ ...
लोकतंत्र में जनता को ख़ुश करने का एक ज़रिया है. जिस लोकतंत्र को जनता अपनी जीत समझती है, उस लोकतंत्र ...
प्यार में नाउम्मीदी भी बहुत बड़ी उम्मीद होती है. दुनिया के सबसे टूटे दिल आशिक़ के दिल में भी उम्मीद ...
अधूरे पने में एक अद्भुत सौंदर्य होता है. भले ही अधूरी चीज़ें बेवजह की दिखें, पर उनका गहरा अर्थ होता ...
हम जीवन की आपाधापी में इतने उलझे होते हैं कि उम्र कब बीत जाती है, पता ही नहीं चलता. कुंवर ...
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और फ़िलॉसफ़ी में गहरा नाता है. पेशे से इंजीनियर रहे नरेश सक्सेना की कविता ‘पानी क्या कर रहा ...
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम ...
वफ़ा और बेवफ़ाई वो दो चीज़ें हैं, जिनसे उर्दू शायरी को खाद-पानी मिलता है. इन्हीं दोनों के इर्द-गिर्द सिमटी यह ...
स्त्रियों का लिखा उनका स्वयं का भोगा गया दुख होता है. क्यों उनकी लिखी पंक्तियों को सीरियसली लेना चाहिए, बता ...
कहते हैं बुढ़ापा भी एक तरह का बचपना होता है. पिता के चश्मे को माध्यम बनाकर लिखी गई यह कविता ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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