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जाने किस-किसका ख़्याल आया है: दुष्यंत कुमार की कविता

विसंगियों के ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल कई विसंगत जोड़ियों को बेहद नज़ाकत से बताती है. जाने किस-किसका ख़्याल ...

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इस मोड़ से तुम मुड़ गई फिर राह सूनी हो गई: दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल

जीवन की वास्तविकता से वाक़िफ़ होने के बावजूद सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देती दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल पढ़िए ...

तुम्हारे पांव के नीचे कोई ज़मीन नहीं: दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल

ज़मीनी हक़ीक़त से नाकिफ़ लोगों को आईना दिखाती दुष्यंत कुमार की यह ग़जल, सत्ता की तानाशाही के प्रति ज़ोरदार आवाज़ ...

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