अजब इक शोर सा बरपा है कहीं: जॉन एलिया की शायरी
जहां गहरी ख़ामोशी होती है, वहीं सबसे ज़्यादा शोर होता है. जो चला जाता है, वह हमेशा हमेशा के लिए ...
जहां गहरी ख़ामोशी होती है, वहीं सबसे ज़्यादा शोर होता है. जो चला जाता है, वह हमेशा हमेशा के लिए ...
लोकतंत्र में जनता को ख़ुश करने का एक ज़रिया है. जिस लोकतंत्र को जनता अपनी जीत समझती है, उस लोकतंत्र ...
स्त्रियों का लिखा उनका स्वयं का भोगा गया दुख होता है. क्यों उनकी लिखी पंक्तियों को सीरियसली लेना चाहिए, बता ...
जहां विडंबना है, विरोधाभास है, वहां कविता है. कृषि प्रधान देश भारत में कृषकों की हालत को बयां करती अरुण ...
मोहब्बत की शायरियों में मिठास के साथ, एक चुटीलापन दिवंगत शायर जॉन एलिया की पहचान थी. प्रेमिका की शहर वापसी ...
आपातकाल के विरोध में लिखी रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है’ बेहद चर्चित रही ...
सरकार कोई भी हो, भले ही उसके जनता के हित के कितने ही वादे क्यों न किए हों, एक समय ...
वरिष्ठ साहित्यकार अरुण कमल की कविता ‘धार’ मेहनतकश वर्ग की ज़िंदगी की कहानी कहती है. साथ ही कवि यह भी ...
सतत चलती रहनेवाली, बहती रहनेवाली नदी भी सुस्ताना चाहती है. बिल्कुल एक कविता की तरह. गुलज़ार साहब की कविता ‘एक ...
महिला वेदना और मुद्दों को आवाज़ देनेवाली कवयित्री निर्मला पुतुल उस पुरुषवादी समाज से सवाल कर रही हैं, जिसका मानना ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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