आदमी नामा: नज़ीर अकबराबादी की कविता
अठारहवीं सदी के शायर-कवि नज़ीर अकबराबादी को आम आदमी का कवि कहा जाता था. अपनी लोकप्रिय रचना आदमी नामा में ...
अठारहवीं सदी के शायर-कवि नज़ीर अकबराबादी को आम आदमी का कवि कहा जाता था. अपनी लोकप्रिय रचना आदमी नामा में ...
एक पिता के लिए बेटियां क्या होती हैं, बता रही है कुंवर बेचैन की कविता ‘बेटियां’. बेटियां शीतल हवाएं हैं ...
अरुण चन्द्र रॉय की कविता ‘डरता हूं मेरे बच्चे’ बयां करती है एक मध्यवर्गीय कस्बाई पिता का भय. कार्टून चैनलों ...
हम चाहें या न चाहें, वक़्त हमें बदल ही देता है. फ़ादर्स डे विशेष कविता ‘पिता के घर लौटने पर’ ...
कूड़ा बीनते बच्चों को देखकर किसका मन द्रवित नहीं होता होगा! कूड़ा बीनते बच्चों को देखकर कोई भी संवेदनशील मन ...
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर कविता ‘आत्मत्राण’ में ईश्वर से बात कर रहे हैं. वे ईश्वर से दुख, हानि, मुसीबत आदि से ...
हाल के समय में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सड़कों पर तेज़ी से दौड़ रहे, तोड़-फोड़ कर रहे और ...
चाहे लाख कोशिश कर लें संघर्ष करके अपने बूते पर सफलता हासिल करनेवालों को कोई हरा नहीं सकता. ऐसे ही ...
हर बीतते दिन के साथ हम कहते हैं कि दुनिया बदल रही है और यहां जीना कठिन होता जा रहा ...
बीते हुए समय की सुखद यादों को पकड़कर रखने से वर्तमान का दुख और भी बढ़ जाता है. आप चाह ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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