• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

पिता के घर लौटने पर

अमरेन्द्र यादव by अमरेन्द्र यादव
June 19, 2022
in कविताएं, ज़रूर पढ़ें, बुक क्लब
A A
Fathers-Day
Share on FacebookShare on Twitter

हम चाहें या न चाहें, वक़्त हमें बदल ही देता है. फ़ादर्स डे विशेष कविता ‘पिता के घर लौटने पर’ बता रही है, वक़्त ने चुपचाप कितना बदल दिया है पिता को.

पिता बाहर जाते, पैसे कमाने
और लौटते, थकान कमाकर
सामान ख़रीदने निकलते और
अक्सर घर लाते, ग़ुस्सा उठाकर

घर में हमारी आवाज़ें चुभती उन्हें
बस आंखें उठाकर देख लेते एक बार
कमरे में पसर जाता सूई पटक सन्नाटा
हां, किचन में खाने की थाली लगने की आवाज़ें
ज़रूर डरते-डरते छेड़ती रहतीं, उस सन्नाटे को

इन्हें भीपढ़ें

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
epstein-file

एप्स्टीन फ़ाइल खुलासे के बाद: दुनिया के इन 20 फ़ीसदी लोगों को मेरा सलाम

February 4, 2026

ज़माना, पिता से फ़रमाइश करने का नहीं था
महीने की किन्हीं तारीखों को, वो ख़ुद ही पूछते
किताब, कापी, कलम सब है ना?
हम बिन बोले, बस सिर हिला देते
हमारी ये ज़रूरतें, बिना मांगे पूरी करते पिता
जैसे उनके घर पहुंचते ही
मां लगा देती खाने की थाली, बिना पूछे
तब पिता, पिता नहीं एक तंत्र थे
हम बच्चे, बच्चे नहीं बस यंत्र थे

जब पहली बार सुना कि
शेषनाग उठाए रहता है
धरती को अपने फन पर
शेषनाग की जगह पिता
घर कंधों पर उठाए नज़र आए
आगे कल्पनाओं में, शेषनाग की जगह
यूनानी देवता एटलस ने रिप्लेस कर ली
पर पिता की छवि, धीर-गंभीर ही बनी रही
राहत-चिंता, कमाई-ख़र्च का अनुपात
उनके काले से सफ़ेद हो रहे बालों की तरह बढ़ता रहा

वह तेज़ी से बदल रहा दौर था
देश ने खोल दिए थे, दुनिया के लिए दरवाज़े
टीवी पर घुंघराले बालों वाला एक लड़का
ठंडा पी, बल्ले से तापमान बढ़ा रहा था
हम भी चाहते थे, अपने हाथों में वैसा ही बल्ला
सोचा इस बार भी, बिन मांगे पिता समझ जाएंगे
पर इम्तिहान के अच्छे नतीजे के बाद, पिता ने
पुरस्कार में दी थी, चाबी वाली एचएमटी घड़ी
बल्ला भूल, दोस्तों को घड़ी दिखाते रहे
राह चलतों को, रुबाब से समय बताते रहे
समय के साथ, चाबी घड़ी डिजिटल में बदल गई
जैसे बच्चों के बढ़ते ही रातोंरात
सीनियर सिटिज़न में बदल जाते हैं पिता

सख्तमिजाज़ पिता, जीवनभर मिठास दिल में छुपाए रहे
आजकल वही मिठास, उनके ख़ून में उतर आई है
पिता बाहर जाते हैं, मिठास घटाने
और लौटते हैं, बातें कमाकर
समय ख़र्चने निकलते हैं
और अक्सर लाते हैं, सुकून उठाकर
अब पिता, सिर्फ़ पिता नहीं एक दुनिया हैं
उनके बच्चे, माता-पिता बन गए हैं
और उन्हें भी एक दिन दुनिया बन जाना है!

Illustration: Pinterest

Tags: Aaj ki KavitaHindi KavitaHindi KavitayenHindi PoemKavitaPita: Tab aur Ab by Amrendra Yadavआज की कविताकविताहिंदी कविताहिंदी कविताएं
अमरेन्द्र यादव

अमरेन्द्र यादव

Related Posts

ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन
ज़रूर पढ़ें

ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन

January 30, 2026
गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे
ज़रूर पढ़ें

गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे

January 29, 2026
multiple-partners
ज़रूर पढ़ें

69% ने माना रिश्तों में खुलापन हो रहा है स्वीकार्य: आईपीएसओएस-ग्लीन सर्वे

January 22, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum