ईश्वर नहीं नींद चाहिए: अनुराधा सिंह की कविता
यौवन से लेकर बुढ़ापे तक औरतों का नींद से नाता उनके संपूर्ण जीवनचक्र को बयां कर जाता है. कवयित्री अनुराधा ...
यौवन से लेकर बुढ़ापे तक औरतों का नींद से नाता उनके संपूर्ण जीवनचक्र को बयां कर जाता है. कवयित्री अनुराधा ...
लड़कियां भागती हैं. पर लड़कियों क्यों भागती हैं? क्यों भागती आई हैं? क्यों भागती रहेंगी? वे अपने पीछे क्या छोड़ ...
वर्तिका नन्दा की यह कविता उन रानियों की कहानी है, जिनके पास सारे सच तो थे, पर ज़ुबां बंद थी. ...
पहाड़ों की एक मासूम-सी दादी कहती है, टॉर्च में उजाले के साथ आग भी होनी चाहिए…दादी के माध्यम से कवि ...
मल्टीनैशनल कंपनियां में काम करनेवाले हों या सरकारी नौकरी करनेवाले, छुट्टी सभी की निजी पूंजी है. वरिष्ठ कवि नरेश चन्द्रकर ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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