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ओए अफ़लातून
Home ज़ायका

पानी पूरी के चटकारों की चटपटी कहानी

कनुप्रिया गुप्ता by कनुप्रिया गुप्ता
January 29, 2021
in ज़ायका, फ़ूड प्लस
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चलिए आज एक पहेली बूझिए: कौन सा ऐसा व्यंजन है जो ‘जी ललचाए रहा न जाए’ वाली टैगलाइन पर पर्फ़ेक्ट बैठता है? या कौन सा ऐसा व्यंजन है जिसके लिए कहा जाता है कि ‘लड़कियों की प्लेट से कुछ भी मांग लेना, पर ये मत मांगना’? वैसे तो आप समझ ही गए होंगे पर मैं बता ही देती हूं कि आज बात हो रही है गोलगप्पे की, पानी पूरी की, पानी पताशे की ,फुलकी की, गुपचुप की, पुचका की या फुचका की. जितनी जगहें उतने नाम और तरह तरह के स्वाद. तो आइए जानें, अपनी पसंदीदा पानी पूरी को क़रीब से…

दुनिया के बदलने के साथ अन्य व्यंजनों ने अपना स्वाद बदला या नहीं ये शोध का विषय हो सकता है, पर पानी पूरी ने हर तरह के स्वाद को ख़ुद में समा लिया है. गली, बाज़ार का ठेला हो या बड़े और इंटरनैशनल फ़ूड शो, पानी पूरी ने हर जगह लोगो को अपना दीवाना बनाया है… और इसके भरावन और पानी के साथ तो इतने एक्सपेरिमेंट हुए हैं किआप खाने निकलें तो पेट भर जाए, पर मन न भरे.

पानी पूरी तेरे कितने रूप: कॉलेज के दिनों की बात है. अलग-अलग राज्यों से लोग पढ़ने आते थे और जितने राज्यों के लोग, ख़ासकर हम लड़कियां थीं, उतने ही नामों से पानी पूरी को बुलाया करतीं और फिर अपने राज्य में बनने वाले भरावन और पानी के स्वाद का वर्णन करतीं… और सब की सब अपने यहां के स्वाद को याद करतीं.

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अलग राज्य क्या, हर ठेले वाले के, हर दुकान वाले की बनाई हुई पानी पूरी के पानी के स्वाद में अंतर होता है और ये अंतर होता है मसालों का, जो पानी के स्वाद में अंतर ला देता है. कहीं इनमे बूंदी भरी जाती है, कहीं आलू का मसाला, कहीं काले चने, कहीं सफ़ेद मटर और आलू,प्याज़ और दूसरे सलाद और कहीं अंकुरित मूंग और चना. वहीं दूसरी तरफ़ पानी के साथ भी तरह तरह के एक्सपेरिमेंट किए जाते हैं. इतने कि ढूंढ़ने पर आपको चॉकलेट पानी पूरी, आइसक्रीम पानी पूरी, ऑरेंज पानी पूरी और वोदका पानी पूरी भी खाने को मिल जाएंगी.
इंदौर में तो आपको 5,7, से लेकर 11 फ़्लेवर तक की पानी पूरी खाने को मिल जाएगी. स्टील की प्लेट को उल्टा करके उसपर पेंट से पानी का फ़्लेवर लिखा मिलेगा, जैसे- जीरा, इमली, खट्टा मीठा ,निम्बू, जलजीरा, हींग, लहसुन, पुदीना, धनिया-पुदीना, हाजमा-हजम, आम पना और ऐसे ही एक-दो और फ़्लेवर, जो हर दुकान की अपनी स्पेशियालिटी होती है. इन ठेलों और दुकानों पर आप एक बात और नोटिस करेंगे पानी पूरी में पानी भरने वाली चम्मच में नीचे की तरफ़ एक छोटा छेद होता है, जिससे पानी को आसानी से पहले से हाथ के अंगूठे से छेद की हुई पूरी में डाला जा सकता है.

इतिहास के झरोखे से: हर व्यंजन का अपना इतिहास होता है और ये छोटी-सी दिखने वाली पानी पूरी भी अपने जन्म के पीछे कहानियां लिए बैठी है. पानी पूरी के जन्म के पीछे कई कहानियों का उल्लेख है, पर भोजन विशेषज्ञ ये मानते हैं की पानी पूरी का जन्म तक़रीबन 150 साल के अन्दर ही पुराने मगध और आज के बिहार-उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में हुआ था. क्यूंकि यहां के लोग अपने काम के सिलसिले में जगह-जगह जाते रहे तो ये पूरे भारत में फैल गई और भारत में ही क्या, अब तो विश्व के जिस किसी हिस्से में भारतीय लोग हैं वह पानी पूरी भी है.
पानी पूरी से जुड़ी एक कहानी की पहुंच तो महाभारत तक भी है! जब पांडव वनवास में थे तो कुंती ने थोड़ा-सा आटा और आलू देकर द्रौपदी से कहा-ऐसा कुछ बनाओ कि मेरे पांचों पुत्रों का पेट भर जाए. बस फिर क्या था द्रौपदी से उस आटे से छोटी-छोटी पूरियां बनाईं. आलू से मसाला बनाया और पानी में मसाले मिलाकर पानी पूरी तैयार कर दी. पांडवों ने पेटभर भोजन किया और द्रौपदी से ख़ुश होकर कुंती ने उन्हें अमर होने का वरदान दिया. अब इस कहानी में पेंच ये है की आलू आया भारत में 500 साल पहले और महाभारत हुआ 5000 साल पहले तो कुंती ने द्रौपदी को आलू कैसे दिए होंगे? पर इस तरह की लोककथाओं और किंवंदतियों से भोजन पदार्थों का जुड़ना, समाज को इन व्यंजनों से अधिक गहरे तक जोड़ता है इसलिए ऐसी कहानियों का अपना अलग महत्व है.

कहीं-कहीं यह भी उल्लेख है कि पानी पूरी का जन्म शाहजहां काल में दिल्ली (तब का शाहजहांनाबाद) में हुआ और इसके बाद ही ये प्रचलित हुई. मुख्य बात यह है कि इसके जन्म के बाद ये अब किसी की भी नहीं रही और जहां-जहां गई वहां के रंग में ढल कर वहां की हो गई.

मुझे तो पानी पूरी पसंद है ही और उसके साथ आख़िरी में मिलनेवाली सूखी फुलकी भी बेहद पसंद है! जब तक भोपाल-इंदौर रही पानी पूरी खाना मेरा प्रिय शगल था और जब मुंबई गई तो वहां एक अलग ही ढंग की, मसाले को गरम करके खाने वाली पानी पूरी खाई. हालांकि मेरी पसंद हमेशा आलू वाला मसाला और ठंडा धनिया-पुदीने वाला पानी या खट्टा मीठा पानी रहा पर जैसा देस, वैसा भेस की तर्ज पर, जहां जो मिलता गया, खाते चले गए.

आप भी बताइए कि आपको पानी पूरी का कौन-सा फ़्लेवर पसंद है और आपके यहां इसे क्या कहते हैं? आपके भी तो क़िस्से होंगे, यादें होंगी पानी पूरी से जुड़ी हुई, हमें उनका इंतज़ार रहेगा नीचे कॉमेंट में या फिर इस ईमेल आईडी पर: oye.aflatoon@gmail.com

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

Tags: golgappehistory of pani puripani patashapani puriphulkipuchkaकनुप्रिया गुप्तागोल गप्पेपानी पताशापानी पूरी का इतिहासपुचकाफुलकीसाप्ताहिक कॉलम
कनुप्रिया गुप्ता

कनुप्रिया गुप्ता

ऐड्वर्टाइज़िंग में मास्टर्स और बैंकिंग में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा लेने वाली कनुप्रिया बतौर पीआर मैनेजर, मार्केटिंग और डिजिटल मीडिया (सोशल मीडिया मैनेजमेंट) काम कर चुकी हैं. उन्होंने विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटिंग भी की है और बैंकिंग सेक्टर में भी काम कर चुकी हैं. उनके कई आर्टिकल्स व कविताएं कई नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं. फ़िलहाल वे एक होमस्कूलर बेटे की मां हैं और पैरेंटिंग पर लिखती हैं. इन दिनों खानपान पर लिखी उनकी फ़ेसबुक पोस्ट्स बहुत पसंद की जा रही हैं. Email: guptakanu17@gmail.com

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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