पीछे छूटी हुई चीज़ें: नरेश सक्सेना की कविता
यूं तो बिजली की चमक के काफ़ी बाद आवाज़ सुनाई देने का वैज्ञानिक कारण होता है. पर एक कवि इसके ...
यूं तो बिजली की चमक के काफ़ी बाद आवाज़ सुनाई देने का वैज्ञानिक कारण होता है. पर एक कवि इसके ...
जितनी तक़लीफ़ें, यातनाएं एक वृक्ष को सहनी पड़ती हैं, उतनी हम मनुष्यों को नहीं. फिर भी वृक्ष के बीज हमेशा ...
वृक्ष हमारी स्वार्थपरकता का साक्षात गवाह है. जब तक हम जीवित रहते हैं, उसके फल, फूल, छाया का आनंद लेते ...
आधे और पूरे की व्याख्या करनेवाली ऐसी बेमिसाल कविता आपने शायद ही कभी पढ़ी हो. कवि नरेश सक्सेना की यह ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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