नष्ट कुछ भी नहीं होता: प्रियदर्शन की कविता
कहते हैं कोई भी चीज़ चिरस्थाई नहीं होती. अर्थात नष्ट होना सबकी नियति है. पर क्या चीज़ें वाक़ई नष्ट हो ...
कहते हैं कोई भी चीज़ चिरस्थाई नहीं होती. अर्थात नष्ट होना सबकी नियति है. पर क्या चीज़ें वाक़ई नष्ट हो ...
हमारी भाषा कैसे-कैसे बेख़बर अत्याचार करती है. आप किसी को जलेबी जैसा सीधा कहकर उसका मज़ाक उड़ाते हैं. इस प्रचलित ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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