• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home ज़रूर पढ़ें

अगर काबुल का नहीं है काबुली चना तो कहां का है? यहां जानिए…

कनुप्रिया गुप्ता by कनुप्रिया गुप्ता
October 3, 2021
in ज़रूर पढ़ें, ज़ायका, फ़ूड प्लस
A A
Share on FacebookShare on Twitter

काबुली चने का नाम सुनकर क्या आपके भी दिल में कुछ-कुछ होता है? क्या-क्या याद आ जाता है आपको? छोले भटूरे? छोले कुलचे? छोले चावल? मुझे तो आजकल छोले देखकर इन सब के साथ-साथ प्रोटीन का भंडार दिखता है. नहीं समझे? जल्द ही समझ जाएंगे. चलिए आज बात करते हैं काबुली चने वाली…

 

वेजिटेरियन हैं? प्रोटीन के नाम पर शरीर में कुछ नहीं जाता, ऐसा आपने कितने ही लोगों को कहते सुना होगा. ये सच भी है, क्योंकि वेज फ़ूड में प्रोटीन सच में कम होता है और उससे भी बड़ी बात कि हमारी बदलती जीवनशैली के कारण वैराइटी में कमी आई है, जिसके कारण वेजिटेरियन लोगों को सारे तत्व ठीक ढंग से नहीं मिल पाते. पर यक़ीन मानिए, काबुली चने प्रोटीन और फ़ाइबर का भंडार हैं.
अब आप सोचेंगे कहां ये छोले भटूरे की बात करते-करते प्रोटीन का राग गाने लगी, देखिए चटोरी हूं तो बात तो चटोरेपन की होगी ही, पर साथ में ज़रा स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए तो बुरा ही क्या है?

इन्हें भीपढ़ें

gen-z

ओपन लेटर जेन ज़ी के नाम

July 31, 2026
किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

June 25, 2026
Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026

कहानी काबुली चने की: नाम में क्या रखा है? ये आपने बहुत बार सुना होगा न, पर बात ये है कि नाम से फ़र्क़ तो पड़ता है! अब देखिए भारत में उगने वाले चने का नाम पड़ा काबुली चना तो लोगों को तो यही लगेगा न कि सबसे पहले काबुल से ये चना भारत आया होगा, पर सच ये है कि काबुल यानी अफ़गानिस्तान में तो ये चना न के बराबर उगता है. उगता तो ये भारत में बड़ी मात्रा में है, पर हुआ ये कि बहुत पहले काबुल के लोग भारत में व्यापर करते थे. यहां आसानी से आते-जाते भी थे और यहां रहते भी थे और उस समय ये लोगा बेचा करते थे “चना” और ये चना भारत की ही फसल होती थी. काबुल से आए व्यापारी बस उनका व्यपार करते थे और इसलिए इन चनों का नाम ही काबुली चना पड़ गया

जानिए कहां का है काबुली चना: अब यह चना काबुल का नहीं है तो इसका मतलब ये भी नहीं है कि इसका जन्म भारत में ही हुआ था. लगभग 9000 साल पहले के इसके अवशेष मिडिल ईस्ट में मिले हैं और 7500 साल के आसपास इसकी खेती किए जाने के प्रमाण टर्की में मिले हैं इसलिए इसे टर्की की पैदाइश कहा जाता है. है न ये मजेदार बात कि मनुष्यों ने बर्तन बनाने शुरू किए उसके पहले से चने उगाए और खाए जा रहे हैं.

कहां-कहां खाया जाता है इसे: काबुली चना सिर्फ़ भारत ही नहीं विश्व के लगभग सभी देशों में अलग-अलग रूप में खाया जाता है. हमारे यहां छोले के रूप में तो अमेरिका और यूरोप के देशों में सलाद या सूप के रूप में. वहीं हम्मस भी इसका बेहद प्रचलित रूप है.

चना मसाला और पिंडी छोले: इस कहानी में अब आएगा मज़ा! जानते हैं पिंडी छोले को पिंडी छोले क्यों कहते हैं? क्योंकि इनका जन्म रावलपिंडी, पकिस्तान (तब का भारत) में हुआ था. ये आम काबुली चने की सब्ज़ी या चना मसाला से रंग, टेक्स्चर और स्वाद तीनो में ही अलग होता है. इसमें चाय पत्ती का पानी उबालते समय मिलाया जाता है, जिसके कारण इसका रंग थोड़ा काला होता है और इसे बघारते टाइम इसमें प्याज़, लहसुन, टमाटर नहीं डाला जाता… बस, मसलों का सही मिश्रण होता है, जो इसे स्वाद देता है. मूल रूप से ये चाय पत्ती इस चनों में नहीं डाली जाती थी, बल्कि सूखा आंवला डाला जाता था, जो इनमे रंग और खटाई दोनों लाता है और विश्वास कीजिए कि सूखे आंवले के कारण छोले में जो स्वाद आता है, वो और किसी चीज़ से नहीं आता. आपने किसी पंजाबी दोस्त के घर या पंजाबी रेस्तरां में अगर छोले खाए होंगे तो आपको सूखे आंवले और अनारदाना पाउडर वाले छोले ही खाने मिले होंगे.
अब एक और ट्रिक छोले बनाते समय उसमे थोडा अनारदाना पाउडर डालिए और आप अगर उंगलियां चाटते न रह जाए तो कहिएगा!
रही बात चना मसाला की तो इसमें ग्रेवी वाले चने बनाए जाते हैं, बाक़ी आम घरों में बनने वाले छोले की बेसिक सब्जी तो सबको पता है ही.

क़िस्से छोले वाले: छोले के किस्से कहां नहीं है , छोले टिक्की, छोले भटूरे, छोले पराठे , छोले कुलचे मेरे दिमाग़ में तो हर जगह छोले भरे पड़े हैं सोचती हूं अगर ये छोले न हो तो ज़िन्दगी चले कैसे? पर आपको एक बात बताती हूं, छोलों को केवल तेल, मसालों के साथ मत खाइए. इन्हें गलाकर सलाद के रूप में खाइए, हम्मस के रूप में खाइए ये आपके शरीर से दुनियाभर की कमियां दूर कर देंगे साथ ही स्वास्थ्य कोअच्छा कर देंगे ये तो मानी हुई बात है.
बाक़ी नवरात्रि आ ही रही है तो छोले पूड़ी खाने की कितनी ही यादें हमारे सामने तैरने लगती हैं. वैसे अगर मेरी बात करें तो मैं छोलों के हर रूप की दीवानी हूं, ख़ासकर अमृतसरी छोले कुलचे मेरे फ़ेवरेट हैं. तो आपको छोले किस रूप में सबसे ज़्यादा पसंद हैं, हमें ज़रूर बताइएगा इस आईडी पर: oye.aflatoon@gmail.com और हम जल्द मिलेंगे अगले किसी व्यंजन की बातें लेकर.

 फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

Tags: ChanaCholeChole BhatureChole KulcheChole RiceChole TikkiHummusKabuli ChanaKanupriya Guptakanupriya gupta's weekly columnPindi Choleweekly columnकनुप्रिया गुप्ताकनुप्रिया गुप्ता का साप्ताहिक कॉलमकाबुली चनाचनाछोलेछोले कुलचेछोले चावलछोले टिक्कीछोले भटूरेपिंडी छोलेसाप्ताहिक कॉलमहम्मस
कनुप्रिया गुप्ता

कनुप्रिया गुप्ता

ऐड्वर्टाइज़िंग में मास्टर्स और बैंकिंग में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा लेने वाली कनुप्रिया बतौर पीआर मैनेजर, मार्केटिंग और डिजिटल मीडिया (सोशल मीडिया मैनेजमेंट) काम कर चुकी हैं. उन्होंने विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटिंग भी की है और बैंकिंग सेक्टर में भी काम कर चुकी हैं. उनके कई आर्टिकल्स व कविताएं कई नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं. फ़िलहाल वे एक होमस्कूलर बेटे की मां हैं और पैरेंटिंग पर लिखती हैं. इन दिनों खानपान पर लिखी उनकी फ़ेसबुक पोस्ट्स बहुत पसंद की जा रही हैं. Email: guptakanu17@gmail.com

Related Posts

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता
बुक क्लब

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika
ओए हीरो

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
epstein-file
ज़रूर पढ़ें

एप्स्टीन फ़ाइल खुलासे के बाद: दुनिया के इन 20 फ़ीसदी लोगों को मेरा सलाम

February 4, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum