• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home ज़रूर पढ़ें

आइए, आज खंगालें इतिहास बाजरे के खिचड़ा का

कनुप्रिया गुप्ता by कनुप्रिया गुप्ता
January 21, 2022
in ज़रूर पढ़ें, ज़ायका, फ़ूड प्लस
A A
Share on FacebookShare on Twitter

राजस्थान के रहनेवालों के मुंह से आपने कई बार सुना होगा, ख़ासकर रेतीले क्षेत्र के आसपास वालों से कि आज बाजरे का खिचड़ा बहुत याद आ रहा है. वैसे बात तो यह है कि घर से बाहर रहनेवालों को तो घर का पानी भी याद आता है! सुना होगा न कई लोगों को कहते हुए- मेरे गांव का तो पानी भी मीठा है, यहां के पानी में भी स्वाद नहीं… पर बाजरे का खिचड़ा याद करने वाले बहुत लोग हैं और आख़िर याद करें भी क्यों न? ये शरीर के लिए बहुत अच्छा भी होता है और राजस्थान में तो इसका ऐतिहासिक महत्व भी है!

 

 

इन्हें भीपढ़ें

gen-z

ओपन लेटर जेन ज़ी के नाम

July 31, 2026
किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

June 25, 2026
Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026

बाजरे का खिचड़ा ऐसा व्यंजन है, जो ठंड और गर्मी दोनों में खाया जाता है, हालांकि ठंड में इसे ज़्यादा बनाया जाता है. और जब से बाजरा वापस से ट्रेंड में आया है, तब से इसकी बातें कुछ ज़्यादा ही सुनाई देने लगी हैं. अब आप कहेंगे बाजरा गया ही कब था? तो आपकी ये बात तो सही है गांवों में से ज्वार-बाजरा कभी गया ही नहीं, पर जैसे-जैसे शहरों में लोग सेहत को लेकर जागरूक होने लगे, तब सौ-सौ तरह के उपाय करने के बाद उन्हें पता लगा कि हमारे पुराने लोग जो चलता-फिरता अन्न या मोटा अन्न खाने के लिए कहते थे, वही स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा था और फिर तो साहब बाज़ार ने जनता की नब्ज़ पकड़ ली… बाजरे के बिस्किट, बाजरे वाली ब्रेड, बाजरे की रोटी और अब तो बाजरे का केक, पिज़्ज़ा, नूडल्स तक आपको बाज़ार में मिलने लगे हैं. मतलब हर वो चीज़ जो मैदे या आटे से बनती थी, उसे बाजरे से बनाने की होड़-सी मचने लगी है. और कुछ न हो पर ये सब शरीर को फ़ायदा पहुंचाए या न पहुंचाए, पर कम से कम नुकसान नहीं पहुंचाएगा, ये मानकर लोग फ़ास्ट फ़ूड में भी बाजरे का प्रयोग बढ़ा रहे हैं.
आप कहेंगे भूमिका इतनी बड़ी, पर बाजरे के खिचड़ा की बात शुरू ही नहीं हुई. तो भई वो इसलिए की बाजरे का खिचड़ा एकदम बेसिक है. इसमें न आटा बनाना है न घोल. इसमें खड़े अनाज वाले सारे गुण हैं तो आप कह सकते हैं ये गुणों और स्वाद दोनों के मामले में बाजरे के अन्य व्यंजनों का सरदार है.

ऐतिहासिक रूप से बाजरे का महत्व: बाजरा और ज्वार का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि पुराने समय में भारत में न मक्का था, न गेहूं और न ही चावल तो जो भी व्यंजन हम-आप आज चावल या गेहूं के आटे से बनाते हैं, वे सभी बाजरा या ज्वार से बनाए जाते थे. इसमें आप रोटी, घाट, इडली सबको शामिल समझिए. हां, पर जो व्यंजन आए ही बाद में, जैसे मुगलों या पुर्तगालियों के साथ तो वो अलग अन्न से तैयार हुए. पर हमारा मुख्य अन्न ज्वार-बाजरा ही रहा है, जो अब सारी दुनिया में लोहा मनवा रहा है.
अब यह मत सोचने लग जाइएगा कि भारत बाजरे के कारण महान है, क्योंकि दुनिया के हर देश में कोई स्थानीय अन्न हमेशा से मौजूद था, जो वहां की भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से वहां के लोगों के लिए अमृत के सामान था. और बाजरा केवल भारत के क्षेत्र में नहीं अफ्रीका में भी बहुतायत में प्रयोग में लिया जाता रहा है.

कैसे बनाया जाता है बाजरे का खिचड़ा: वैसे तो मैं यहां रेसिपी की बातें कम ही करती हूं, क्योंकि ज़रा-सा गूगल बाबा की मदद ली नहीं कि खिचड़ा हाज़िर हो जाएगा, पर ये बड़ी साधारण-सी, लेकिन बहुत पोष्टिक रेसिपी है इसलिए थोड़ी सी बात कर लेते हैं. एक कटोरी बाजरा लीजिए और उसपर पानी डालिए. बिल्कुल थोड़ा सा बस नम होने जितना, जैसे पानी के छींटे डाले हों (पानी में गलाना नहीं है) और इसे 15 मिनिट के लिए रख दीजिए. उसके बाद इस बाजरे को मिक्सर में डालिए और पल्स वाली सेटिंग पर 2-3 बार हल्का-हल्का चलाइए. इसे अब एक थाली में निकाल लीजिए और जैसे सूप से चावल फटके जाते हैं या मूंगफली दाने के छिलके छीलने के बाद फटक कर अलग किए जाते हैं, ठीक वैसे इसे फटकिए तो इसके छिलके अलग हो जाएंगे, जिन्हें अलग कर देना है और बचे हुए बाजरे को को कुकर में दोगुना पानी और स्वादानुसार नमक डालकर (कुछ लोग धुली हुई मूंग दाल भी मिलाते हैं, अगर आप वो करना चाहें तो एक मुट्ठी मूंग दाल धोकर मिला दीजिए) दो-तीन सीटी दें. फिर इसे खोलकर इसमें उबलता हुआ पानी डालना है और लगभग आधे और घंटे इसे खुला रखकर बार-बार हिलाते हुए पकाना है. बाद में अगर ज़रूरत लगे तो और गरम पानी मिलते जाएं और हाथ में बाजरे का कण लेकर चेक करें पूरी तरह नरम हो जाना चाहिए. बस जब ये पक जाए तो गुड़ और घी डालकर इसे खाइए. सर्दियों के मौसम में ये शरीर को गर्मी भी देता है और पोषण भी. और इसके स्वाद के दीवाने तो आपको कई मिल जाएंगे.

क़िस्से खिचड़े वाले: बाजरे के खिचड़े से कई कहानियां जुड़ी हुई हैं, पर जो कहानी सबसे ज़्यादा सुनाई जाती है, वो है कर्मा बाई की कहानी. ऐसा कहा जाता है कि एक बार कर्माबाई के पिताजी शहर से बाहर गए और अपनी बेटी को ठाकुर जी को भोग लगाने के लिए कह गए. कर्मा बाई ने बाजरे का खिचड़ा बनाया और भोग लगाया पर भगवन खाने नहीं आए. वो इंतज़ार करती रही. फिर उन्होंने कान्हा से कहा,‘आओ न कान्हा भोग लगाओ.’ तो भगवन ने कहा,‘तुमने कोई आड़ ही नहीं की मैं कैसे भोग लगाऊं?’ बस, कर्मा बाई ने अपने आंचल से आड़ की और भोग की थाली में से बाजरे का खिचड़ा ख़त्म हो गया .
दूसरा क़िस्सा ये बताया जाता है कि जगन्नाथपुरी में आज भी भगवन को पहला भोग बाजरे के खिचड़े का ही लगाया जाता है, क्योंकि जब कर्मा बाई जगन्नाथपुरी में बस गईं तो वो हर सुबह भगवान को इसी का भोग लगाती थीं. कहते हैं जब कर्मा बाई स्वर्ग सिधार गईं, तब भगवन जगन्नाथ की आंखों से आंसू बहते रहे और आवाज़ आती रही कि मेरी मान चली गई अब मुझे बाजरे का खिचड़ा कौन खिलाएगा? बस तभी से अब तक भगवन को पहला भोग खिचड़े का ही लगाया जाता है.
बाक़ी सारी बातें भावनाओं और श्रद्धा की हैं. मानो तो भगवान, नहीं तो पत्थर. पर ये सच है कि बाजरे का खिचड़ा सच में स्वादिष्ट और सुपाच्य भोजन है, जो शरीर को पोषण भी देता है और सर्द मौसम में शरीर को गर्म भी बनाए रखता है. तो देर किस बात की है? आप भी एक बार बनाइए और हमें बताइए कि आपको कैसा लगा बाजरे का खिचड़ा.

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

Tags: Bajra KhichdaHistory of Bajra KhichdaKanupriya GuptaKhichdaMilletweekly columnकनुप्रिया गुप्ताखिचड़ाबाजराबाजरे का खिचड़ाबाजरे के खिचड़ा का इतिहाससाप्ताहिक कॉलम
कनुप्रिया गुप्ता

कनुप्रिया गुप्ता

ऐड्वर्टाइज़िंग में मास्टर्स और बैंकिंग में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा लेने वाली कनुप्रिया बतौर पीआर मैनेजर, मार्केटिंग और डिजिटल मीडिया (सोशल मीडिया मैनेजमेंट) काम कर चुकी हैं. उन्होंने विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटिंग भी की है और बैंकिंग सेक्टर में भी काम कर चुकी हैं. उनके कई आर्टिकल्स व कविताएं कई नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं. फ़िलहाल वे एक होमस्कूलर बेटे की मां हैं और पैरेंटिंग पर लिखती हैं. इन दिनों खानपान पर लिखी उनकी फ़ेसबुक पोस्ट्स बहुत पसंद की जा रही हैं. Email: guptakanu17@gmail.com

Related Posts

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता
बुक क्लब

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika
ओए हीरो

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
epstein-file
ज़रूर पढ़ें

एप्स्टीन फ़ाइल खुलासे के बाद: दुनिया के इन 20 फ़ीसदी लोगों को मेरा सलाम

February 4, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum