जानें, घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ महिलाओं को मिले अधिकारों के बारे में
भारत में लगभग सत्तर प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में घरेलू हिंसा की शिकार हैं. वर्ष 2005 में बना...
भारत में लगभग सत्तर प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में घरेलू हिंसा की शिकार हैं. वर्ष 2005 में बना...
क़ानूनी धाराओं और अधिकारों की बात करनेवाली किताबें या लेख आमतौर पर इतने टेक्निकल और बोरिंग होते हैं कि उन्हें...
अमूमन धर्मों के बीच अपने-अपने ईश्वर को लेकर लड़ाई होती रही है. इस लड़ाई में जाने-अनजाने, डायरेक्ट-इनडायरेक्ट मानसिक, आर्थिक, बौद्धिक,...
हम चाहें या न चाहें, वक़्त हमें बदल ही देता है. फ़ादर्स डे विशेष कविता ‘पिता के घर लौटने पर’...
दक्षिण की फ़िल्मों की हालिया आंधी से डमगाए बॉलिवुड को एक अदद बिग हिट की तलाश है. भूल भुलैया 2...
हर बीतते दिन के साथ, बहुत कुछ पीछे छूट जाता है. कैलेंडर के पन्नों के बदलते ही काफ़ी कुछ बदल...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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