साल चौरासी: 1984 के सिख दंगों की झलक दिखाता उपन्यास
हाल ही में भारत पुस्तक भंडार से आया लेखिका प्रितपाल कौर का उपन्यास साल चौरासी वर्ष 1984 में हुए सिख...
पत्रकारिता का लंबा, सघन अनुभव, जिसमें से अधिकांशत: महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कामकाज. उनके खाते में कविताओं से जुड़े पुरस्कार और कहानियों से जुड़ी पहचान भी शामिल है. ओए अफ़लातून की नींव का रखा जाना उनके विज्ञान में पोस्ट ग्रैजुएशन, पत्रकारिता के अनुभव, दोस्तों के साथ और संवेदनशील मन का अमैल्गमेशन है.
हाल ही में भारत पुस्तक भंडार से आया लेखिका प्रितपाल कौर का उपन्यास साल चौरासी वर्ष 1984 में हुए सिख...
वसंत ऋतु हर व्यक्ति के मन में अपनी गहरी और अलग छाप छोड़ती है. कवियों और लेखकों को जहां इससे...
सप्ताह की सकारात्मक ख़बरों में इस बार हम बात करने जा रहे हैं सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम...
करियर का चुनाव कभी आसान नहीं होता और जिस उम्र में बच्चों को इसका चुनाव करना होता है, वह उम्र...
मैजिकल मंडे में इस बार देखें स्कूलों में बच्चों की वापसी, इन्फ़ास्ट्रक्चर निर्माण में पर्यावरण का ख़्याल रखने की ख़बर,...
वर्ष 2019 में अपने गठन से लेकर अब तक यानी दो वर्षों में प्रलेक प्रकाशन हिंदी साहित्य के पटल पर...
उन्होंने आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की है, वे इंजीनियर हैं और एक दिन उन्होंने इन्स्टाग्राम पर एक अकाउंट बनाया ‘हिंदी...
हम बतौर लेखक अपनी किताब छपने तक ही सोचते हैं, पर असली काम तो उसके बाद ही शुरू होता है...
तकनीक, यूनिकोड और इंटरनेट के अमैल्गमेशन ने भारत में बोली जानेवाली भाषाओं के विकास को अचानक ही विस्तार दे दिया....
वे लेखिका हैं, कवयित्री हैं, पेंटर हैं, स्क्रिप्ट राइटर हैं, फ़िल्ममेकर हैं और इसके साथ-साथ एक ऐसी शख़्सियत हैं, जिन्होंने...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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