अपने होने का हम इस तरह पता देते थे: राहत इंदौरी की ग़ज़ल
बदलते वक़्त और हालात को ख़ूबसूरती और सच्चाई से रेखांकित करती मरहूम शायर राहत इंदौरी की ग़ज़ल इत्मीनान से पढ़ने...
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बदलते वक़्त और हालात को ख़ूबसूरती और सच्चाई से रेखांकित करती मरहूम शायर राहत इंदौरी की ग़ज़ल इत्मीनान से पढ़ने...
लोकतंत्र में जन सरोकारों को सत्ता तक पहुंचाने में व्यंग्य का बड़ी अहम् भूमिका होती है. व्यंग्य के ज़रिए सत्ता...
हम भयंकर अंतरविरोध वाले समाज में रहते हैं, बता रही है हरिशंकर परसाई की कहानी ‘प्रेम-पत्र और हेडमास्टर’. गुरु लोगों...
एक राजा है, जिसे नींद नहीं आती है. उसके नींद नहीं आने का कारण बहुत समय बाद उसे ख़ुद समझ...
आप जब कभी पर्यटन के लिए कहीं जाते हैं और आपको वहां की लोक सभ्यता और लोक कथाओं के बारे...
पुनर्जागरण काल में जब लोगों के भीतर मानवतावाद और तार्किक वैज्ञानिक खोजों पर बल देने वाली प्रवृत्ति जागृत हुई, तब...
आज का दौर हो या दशकों पहले का. जब कभी तानाशाही जैसा कुछ दिखाई देता है तो मीडिया भले ही...
बेकरी में आटा गूंधनेवाले 26 आदमियों और उनसे रोज़ाना मिलनेवाली तानिया नामक लड़की की दिलचस्प दास्तां है मैक्सिम गोर्की की...
यह उम्मीद ही तो होती है, जो हमें जीवंत बनाए रखती है. शकील अहमद की यह ग़ज़ल भी आपको उम्मीद...
वो हौवा, जिसे अब तक अपनी सूरत भी नहीं मिली है; जो हर उस व्यक्ति की सूरत में ढल जाता...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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