आर्द्रा: कहानी मां के अंतरमन की (लेखक: मोहन राकेश)
दो बेटों, बिन्नी और लाली की मां बचन अपने बेरोज़गार छोटे बेटे बिन्नी के साथ बंबई की एक झुग्गी बस्ती...
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दो बेटों, बिन्नी और लाली की मां बचन अपने बेरोज़गार छोटे बेटे बिन्नी के साथ बंबई की एक झुग्गी बस्ती...
हम सभी जानते हैं कि ड्राइ फ्रूट्स, जैसे- अखरोट, बादाम, काजू, चेस्टनट, मूंगफली और सीड्स हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छे...
हम सभी किसी न किसी तरह के रास्ते की तलाश में जीवनभर में लगे रहते हैं. ऋतुराज की कविता ‘रास्ता’...
अक्सर अपने बड़ों से आपने कई ऐसी बातें सुनी होंगी, जैसे- सकारात्मक सोचो; जैसा सोचोगे, वैसे बन जाओगे; जो हम...
प्यार एक ऐसी शय है, जिसकी वजह से ये दुनिया आबाद है. भले ही अपने लिए साथी ढूढ़ने और उन्हें...
बाल सफ़ेद होना एक सहज और अनिवार्य क़ुदरती प्रक्रिया है. फिर भी हम अपना पहला सफ़ेद बाल देखकर डर जाते...
जीवन की वास्तविकता से वाक़िफ़ होने के बावजूद सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देती दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल पढ़िए...
ट्रैवल करने में आपकी दिलचस्पी है और आप फ्रीक्वेंटली ट्रैवल करती हैं तो ज़ाहिर है कि आपको ट्रैवल वॉर्ड्रोब अपडेट...
बाहर से जगमगाती और आकर्षित करती किसी की ज़िंदगी कितनी स्याह हो सकती है, सर्जन पंड्या की पुत्री कृष्णा की...
स्त्रियां हमारे समाज को इंसानी अच्छाई का पाठ पढ़ानेवाली पहली गुरु होती हैं. आलोक धन्वा की कविता चौक इस सच्चाई...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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