भूलने का युग: मंगलेश डबराल की कविता
अपनी सुविधा अनुसार चीज़ों को भुलाने की हमारी आदत ने हमें सचमुच भुलक्कड़ बना दिया है. हम भूलने के युग...
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अपनी सुविधा अनुसार चीज़ों को भुलाने की हमारी आदत ने हमें सचमुच भुलक्कड़ बना दिया है. हम भूलने के युग...
साड़ी तो यूं भी फ़ैशन की दुनिया में सदबहार हिट आउटफ़िट है. और गुलाबी रंग भी ऐसा होता है, जिसे...
यह बात अपनी जगह सच है कि इस दुनिया में पैसा सबकुछ नहीं है, लेकिन यह बात भी उतनी ही...
जब तक उम्मीद और स्वप्न ज़िंदा रहेंगे, दुनिया ख़ूबसूरत बनी रहेगी. गीत चतुर्वेदी की गहरे अर्थों वाली कविता ‘चंपा के...
सास-बहू का रिश्ता चूहे-बिल्ली के रिश्ते से कम दिलकश नहीं होता. इनके भाग्य में पहले ही दिन से दुश्मनी लिखी...
केक केवल बर्थ डे या ऐनिवर्सरी पर ही खाने वाली चीज़ नहीं है. इसे तब भी खाया जाना चाहिए, जब...
इंसानी सभ्यता को नए स्तर पर पहुंचानेवाली किताबें, टेक्नोलॉजी के दौर में पीछे छूट रही हैं. कभी हमारे हाथों में...
प्यार में हमेशा पाना ही सबकुछ नहीं होता. प्रेम में त्याग की भी अपनी जगह और ख़ूबसूरती है. यह कहानी...
जिस तरह की हमारी लाइफ़स्टाइल है उसमें तनाव होना आम बात है. आजकल बच्चे हों या बड़े सभी किसी न...
डैंड्रफ़ यानी रूसी बालों की एक आम समस्या है, जिस पर ध्यान न दिया जाए तो यह आपके बालों को...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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