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Home बुक क्लब कविताएं

दिल में और तो क्या रक्खा है: नासिर काज़मी की ग़ज़ल

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
June 3, 2025
in कविताएं, ज़रूर पढ़ें, बुक क्लब
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dil-ka-deep
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भारत के अंबाला में जन्मे शायर नासिर काज़मी भी उन लोगों में से थे, जिन्हें देश के बंटवारे का दर्द झेलना पड़ा. उनकी इस ग़ज़ल से प्रेरणा लेकर यूं तो बॉलिवुड के कई गाने बने हैं, लेकिन जो गहराई उनकी इस मूल ग़ज़ल में है, उसे आप ख़ुद ही महसूस करें.

दिल में और तो क्या रक्खा है
तेरा दर्द छुपा रक्खा है

इतने दुखों की तेज़ हवा में
दिल का दीप जला रक्खा है

इन्हें भीपढ़ें

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धूप से चेहरों ने दुनिया में
क्या अंधेर मचा रक्खा है

इस नगरी के कुछ लोगों ने
दुख का नाम दवा रक्खा है

वादा-ए-यार की बात न छेड़ो
ये धोका भी खा रक्खा है

भूल भी जाओ बीती बातें
इन बातों में क्या रक्खा है

चुप चुप क्यूँ रहते हो ‘नासिर’
ये क्या रोग लगा रक्खा है

Tags: Dil mein aur toh kya rakkha haiGhazalNasir Kazmiग़ज़लदिल में और तो क्या रक्खा हैनासिर काज़मीनासिर काज़मी की ग़ज़ल
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हिंदी में स्तरीय और सामयिक आलेखों को हम आपके लिए संजो रहे हैं, ताकि आप अपनी भाषा में लाइफ़स्टाइल से जुड़ी नई बातों को नए नज़रिए से जान और समझ सकें. इस काम में हमें सहयोग करने के लिए डोनेट करें.

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ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

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