• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

यादें: डॉ संगीता झा की कविता

डॉ संगीता झा by डॉ संगीता झा
May 3, 2022
in कविताएं, बुक क्लब
A A
यादें: डॉ संगीता झा की कविता
Share on FacebookShare on Twitter

अक्षय तृतीया और ईद का एक ही दिन आना, उन लोगों के मन में सुनहरी यादों के जी उठने जैसा है, जो अपने बचपन में धार्मिक सद्भावना के साक्षी रहे हैं. कहानीकार-कवयित्री डॉ संगीता झा ‘सना और सीता’ नामक दो सहेलियों के माध्यम से कुरान और गीता को एक प्लैटफ़ॉर्म पर खड़ा कर देती हैं और पूछती हैं ‘क्या वो दिन फिर आएंगे?’ कविता के नीचे डॉ संगीता झा का काव्यपाठ है.

याद बहुत आते हैं
वो बचपन वाले दिन
बचपन के वो
गुड्डे गुड़ियों वाले दिन
ईद पर ढेर सारी सेवईयां
खाने वाले दिन
सेवईयों के संग
ईदी भी पाने वाले दिन

वो सना और मैं सीता
एक था उसका क़ुरान
और एक थी मेरी गीता
मेरा माथा उसकी पेशानी
नहीं हमें थी कोई परेशानी
उसका गुड्डा मेरी गुड़िया
नहीं उससे कोई जोड़ी बढ़िया

इन्हें भीपढ़ें

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

June 25, 2026
Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026

आज फिर ईद मन रही है उसके घर
आज सजा है एक मंडप मेरी डगर
उसका घर मेरी डगर के पास है
दिल में अभी भी उसकी आस है
ना उसने कुछ किया
ना मैंने कुछ किया
फिर सेवईयों का स्वाद
मेरा क्यों घुल गया?

सचमुच याद बहुत आते हैं
बचपन की अक्षय तृतीया के वो दिन
इंतज़ार करते थे जिसका सना और मैं
रोज़ तारे गिन गिन

क्या आज भी उसके गुड्डे के
सपनों में होगी मेरी गुड़िया?
क्या सना भी याद करती होगी
मेरे घर के प्रसाद की पुड़िया?

याद आते हैं बार-बार वो आंखों में
ना अटकने वाले प्यारे-प्यारे दिन
मेरी ईदी उसकी दिवाली
किसी को ना खटकने वाले दिन

आज अक्षय तृतीया और ईद
साथ आए हैं बरसों बाद
आंखों में भर आया है पानी
दिल को सता रही सना की याद

क्यों ना आज फिर दिल को
दी जाए दस्तक
दौड़ कर चूम लूं
मैं सना का मस्तक
एक साथ हम मनाएं
अक्षय तृतीया और ईद
बच्चों के दिल में जगाएं
फिर वही उम्मीद
एक हैं हम सब
एक है हमारा वतन
नहीं बांट सकोगे हमें
कितने भी कर लो जतन

यादों को हक़ीक़त
में बदल डालें
दिमाग़ से दूर कर दें
सारे जाले
संग संग गाएं
बचपन के वो दिन फिर से बुलाएं

मीठी यादों को हक़ीक़त
में बदलने वाले दिन
याद बहुत आते हैं
वो बचपन वाले दिन

Illustration: Pinterest

डॉ संगीता झा द्वारा काव्यपाठ

Tags: Aaj ki KavitaDr Sangeeta JhaDr Sangeeta Jha PoetryHindi KavitaHindi PoemKavitaआज की कविताकविताडॉ संगीता झाडॉ संगीता झा की कविताहिंदी कविताहोलीहोली डॉ संगीता झा
डॉ संगीता झा

डॉ संगीता झा

डॉ संगीता झा हिंदी साहित्य में एक नया नाम हैं. पेशे से एंडोक्राइन सर्जन की तीन पुस्तकें रिले रेस, मिट्टी की गुल्लक और लम्हे प्रकाशित हो चुकी हैं. रायपुर में जन्मी, पली-पढ़ी डॉ संगीता लगभग तीन दशक से हैदराबाद की जानीमानी कंसल्टेंट एंडोक्राइन सर्जन हैं. संपर्क: 98480 27414/ sangeeta.jha63@gmail.com

Related Posts

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल
कविताएं

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

December 15, 2025
ummeed-ki-tarah-lautna-tum
ज़रूर पढ़ें

पाठक को विघटन के अंधेरे से उजाले की ओर मोड़ देती हैं ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ की कविताएं

September 23, 2025
गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता
कविताएं

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता

September 18, 2025
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum