यादें: डॉ संगीता झा की कविता
अक्षय तृतीया और ईद का एक ही दिन आना, उन लोगों के मन में सुनहरी यादों के जी उठने जैसा ...
अक्षय तृतीया और ईद का एक ही दिन आना, उन लोगों के मन में सुनहरी यादों के जी उठने जैसा ...
होली रंगों और ख़ुशियों का त्यौहार है, पर सभी के नसीब में ख़ुशियों के रंग नहीं होते. कहानी ‘होली’ एक ...
हमें पता है कि पिछली बार आपने महामारी के आने के पहले ही रंगों, गुलाल और पानी वाली होली खेली ...
कोरोना की दूसरी लहर ने हमारे पसंदीदा त्यौहार होली के रंगों को फीका ज़रूर कर दिया है, पर हमें पता ...
होली भले ही गुज़र चुकी हो, पर हमारे यहां तो रंग पंचमी तक सभी पर इसका ख़ुमार चढ़ा ही रहता ...
मूलत: कहानीकार डॉ संगीता झा की होली पर लिखी इस लंबी कविता को आप एक काव्यात्मक कहानी की तरह पढ़ ...
कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते अलग-अलग राज्य सरकारों ने अपने यहां सार्वजनिक रूप से होली खेलने पर प्रतिबंध लगा ...
माना कि कोरोना ने त्यौहार मनाने के हमारे उत्साह को कम कर दिया है, पर हम उत्सवधर्मी भारतीय छोटे स्तर ...
आज उनसे मिलना है हमें, आज उनसे मिलना है हमें चलो उनके लिए कुछ लेते चलें थोड़ी गुझिया बर्फ़ी लेते ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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