• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

होली: डॉ संगीता झा की कविता

डॉ संगीता झा by डॉ संगीता झा
March 28, 2021
in कविताएं, बुक क्लब
A A
Share on FacebookShare on Twitter

मूलत: कहानीकार डॉ संगीता झा की होली पर लिखी इस लंबी कविता को आप एक काव्यात्मक कहानी की तरह पढ़ सकते हैं. इस कविता में एक महिला के बचपन, किशोरावस्था और प्रौढ़ावस्था को एक कॉमन धागे से नत्थी किया गया है. वह धागा है होली के त्यौहार का. आप पढ़ने में ज़्यादा विश्वास नहीं रखते तो ख़ुद कवयित्री की आवाज़ में इसे सुन भी सकते हैं.

सालों पहले मेरा एक बचपन था
जिसमें केवल सच पन था
ख़ुशियां थी ढेर सारी
पैसा थोड़ा कम था
दिल के थे अमीर हम
बचपन में बड़ा दम था
यादों के उन गलियारों में
अभी भी मैं तफ़री कर आती हूं
आज भी उन गलियारों की यादों में
ख़ुशियां ढेरों पा जाती हूं
जुड़े हुए थे तब दिल सबके
जुड़े हुए थे सबके घर
मेरे घर को जाती थी
एक चौड़ी लम्बी सी डगर
उस डगर के उस पार
एक लंबा चौड़ा नाला था
सारे बचपन में घर छोड़
वहीं मैंने अपना डेरा डाला था
वहीं बनाती मैं मिट्टी के चावल
और अधपकी पत्थर की दाल
कभी कभी हरी घास की सब्ज़ी
और बुनती सपने बेमिसाल
सारी सखियां रोज़
घर पर मेरे खाना खाने आतीं
अपने साथ कभी-कभी वो भी
गोबर कचरे के पापड़ ले आतीं
बचपन में मेरे सपने ही सपने थे
अम्मा बुआ चाची मामी सब अपने थे
सोचो क्या-क्या ना हुआ करता था
उस बचपन से हर कोई जलता था
जले कैसे ना हमारे पास ख़ुशियों का
एक बड़ा ज़ख़ीरा हुआ करता था
जिसने भी देखा था हमें वो
ऐसे ही बचपन की दुआ करता था
उसके बाद चुपके से जवानी ने
क़दम रखा ही था
हमने ख़ुद को निहारने सराहने
का सुख चखा ही था
वो तो एक होली का दिन था
हर दिनों से वो कुछ भिन्न था
मेरा मुंह लाल पीला नीला था
उस पर चिपका कीचड़ गीला था
खेल कर होली बैठी थी मैं
अपने उस बचपन के नाले के साथ
आंखों में कुछ सपने बुनते हुए
नाले की मुंडेर पर था मेरा हाथ
अचानक पीछे से आकर चुपके से
किसी ने ली आंखें मेरी भींच
खुमारी का एक बीज था अंदर
प्यार की हल्की बारिश में गया वो सींच
पलट के जो देखा उसे
नज़रों से उसकी नज़रें मेरी टकराई
वो भी एकटक देखता रहा
ना मैंने, ना उसने पलकें झपकाईं
मेरी तरह उसका चेहरा भी
नीला-पीला लेकिन आंखें चमकीली
एकटक निहारती रही मैं उसे बस
उसकी भी थी मुझ पर नज़र कटीली
तुरंत हो गया गुम वो छू कर मेरा दिल
उन क़ातिलाना नज़रों से मन गया खिल
उसके बाद जो हुआ वो ना जानो
क्या-क्या ना किया मैंने मानो ना मानो
वो आंखें इस क़दर दिल को भा गईं
दिल पर उन आंखों की खुमारी छा गई
उन आंखों की तलाश में चकरघिन्नी सी घूमती
अपने सपनों को बड़ी उम्मीदों से सींचती
चप्पे-चप्पे गली-गली उन नज़रों को छाना
हालत देख मेरी सबने मुझे पागल माना
कहीं नहीं लगा फिर मेरा दिल
ज़िंदगी बन गई मेरी मुश्क़िल
खिलखिलाती हवा से एक संजीदी लड़की
किसी के लिए भी दोबारा आंख ना फड़की
घर वालों ने कर दिया मुझे तैयार
दूल्हा आया मेरा होके घोड़ी पे सवार
वरमाला लिए मैं मंडप की ओर बढ़ी
मेरी आंखें फिर उन्हीं आंखों से लड़ी
खड़े-खड़े मैं ज़ोर से लड़खड़ाई
मेरी आंखें जब उन्हीं आंखों से टकराईं
वही आंखें जिन्हें बरसों से ढूंढ़ रही थी
कितना दर्द कितनी तन्हाई सही थी
इधर देखिए जब फ़ोटोग्राफ़र ने कहा
फूट पड़ी मैं मुझसे ना गया रहा
वही आंखें फ़ोटोग्राफ़र बन सामने खड़ी थी
हाथ में मेहंदी पैरों में पायल की बेड़ी थी
बरसों पहले वो एक होली का दिन था
हर दिनों से वो बड़ा भिन्न था
लेकिन जो मेरी शादी का दिन था
उस दिन दिल बड़ा खिन्न था
बरसों पुराना प्यार सामने खड़ा था
लोक लाज शर्म हया का पर्दा बड़ा था
मैं मजबूर थी, बेबस थी गई ज़माने से हार
चूं ना चां चुपचाप डाल दिए हथियार
हर होली पर आज भी बरसों बाद
वो आंखें आती हैं बड़ी याद… बड़ी याद…

Illustration: Pinterest

इन्हें भीपढ़ें

Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

December 15, 2025

डॉ संगीता झा द्वारा काव्यपाठ

Tags: Aaj ki KavitaDr Sangeeta JhaDr Sangeeta Jha PoetryHindi KavitaHindi PoemKavitaआज की कविताकविताडॉ संगीता झाडॉ संगीता झा की कविताहिंदी कविताहोलीहोली डॉ संगीता झा
डॉ संगीता झा

डॉ संगीता झा

डॉ संगीता झा हिंदी साहित्य में एक नया नाम हैं. पेशे से एंडोक्राइन सर्जन की तीन पुस्तकें रिले रेस, मिट्टी की गुल्लक और लम्हे प्रकाशित हो चुकी हैं. रायपुर में जन्मी, पली-पढ़ी डॉ संगीता लगभग तीन दशक से हैदराबाद की जानीमानी कंसल्टेंट एंडोक्राइन सर्जन हैं. संपर्क: 98480 27414/ sangeeta.jha63@gmail.com

Related Posts

ummeed-ki-tarah-lautna-tum
ज़रूर पढ़ें

पाठक को विघटन के अंधेरे से उजाले की ओर मोड़ देती हैं ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ की कविताएं

September 23, 2025
गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता
कविताएं

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता

September 18, 2025
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत
कविताएं

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत

June 12, 2025
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum