• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

फिर बापू! : हूबनाथ पांडे की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
October 2, 2023
in कविताएं, ज़रूर पढ़ें, बुक क्लब
A A
फिर बापू! : हूबनाथ पांडे की कविता
Share on FacebookShare on Twitter

गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को याद करने की होड़-सी चल पड़ती है. नारे लगाए जाते हैं, बैनर बनाए जाते हैं, जुलूस निकाले जाते हैं और अब तो स्वच्छता को लेकर प्रयास भी किए जाते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या हमने अपने जीवन में गांधी की नैतिकता को उतारा है या फिर बस एक दिन उन्हें याद करके हम अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं? उनके प्रति हमारे दोगलेपन को उजागर करती और कुछ सवालों के जवाब तलाशती है यह कविता

 

तुम अच्छे शिक्षक नहीं हो
शिक्षक तो
अभय देता है

इन्हें भीपढ़ें

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
epstein-file

एप्स्टीन फ़ाइल खुलासे के बाद: दुनिया के इन 20 फ़ीसदी लोगों को मेरा सलाम

February 4, 2026
ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन

ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन

January 30, 2026

किंतु
तुम्हारे डर से
हम लोग
पूरा देश साफ़ करने पर
पिल पड़े हैं

तुमने तो
आंतरिक  स्वच्छता
पर ज़ोर दिया था

भीतर
हिंसा घृणा ईर्ष्या घमंड
की गंदगी तो
दिन दूनी बढ़ रही है

स्वच्छता अभियान
उसे छूकर भी नहीं गुज़रा

और हम
बेचारे तुम्हारे शिष्य(?)
झाड़ू लेकर कूद पड़े
घंटे भर के लिए

तुम अच्छे शिक्षक नहीं हो

इसीलिए हम लोग
अवसर पाते ही
गालियों और गोलियों से
नवाज़ते हैं तुम्हें

तुम अहिंसा अहिंसा
रटते रहे
हम नित नए हथियार
जुटाते रहे

आज हम अकेले
पूरी धरती का
नाश करने का
सामर्थ्य रखते हैं

फिर भी
तुमसे डरते हैं

डरता तो वह भी था
जिसके राज में
सूरज नहीं डूबता था

हमारा सूरज तो
तुम्हारे बाद
ठीक से उगा भी नहीं

दरअसल
तुम जीवन भर
सीखते ही रहे
सिखाना तो तुम्हें
आया ही नहीं

इसलिए
तुम अच्छे शिक्षक
नहीं बन पाए

अबकि बार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में
जुड़ जाइएगा

हो सकता है
आपका भी
उद्धार हो जाए

पर अब
बराए मेहरबानी
हमें डराइए नहीं

अभय दीजिए
कि आपकी ही तरह

सर्वशक्तिमान सत्ता को
सिर तानकर
चुनौती दे सकें

ग़लत को ग़लत
सही को सही कह सकें

बाहर की सफ़ाई के साथ
भीतर की
सड़नभरी गंदगी पर भी
बिना फोटू ख़िंचवाए
झाड़ू फिरा सकें

और तुम्हारी तरह
पवित्र मुस्कान लिए
निश्छल होकर गा सकें

वैष्णव जन तो
तेने कहिए जे…


फ़ोटो
साभार: पिन्टरेस्ट

 

 

 

 

Tags: Gandhi JayantiHoobnath PandeMahatma GandhiPoem on Mahatma Gandhiगांधी जयंतीमहात्मा गांधीमहात्मा गांधी पर कविताहूबनाथ पांडे
टीम अफ़लातून

टीम अफ़लातून

हिंदी में स्तरीय और सामयिक आलेखों को हम आपके लिए संजो रहे हैं, ताकि आप अपनी भाषा में लाइफ़स्टाइल से जुड़ी नई बातों को नए नज़रिए से जान और समझ सकें. इस काम में हमें सहयोग करने के लिए डोनेट करें.

Related Posts

गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे
ज़रूर पढ़ें

गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे

January 29, 2026
multiple-partners
ज़रूर पढ़ें

69% ने माना रिश्तों में खुलापन हो रहा है स्वीकार्य: आईपीएसओएस-ग्लीन सर्वे

January 22, 2026
stomach-growling
ज़रूर पढ़ें

ठंड के दिनों में पेट के गुड़गुड़ाने की आवाज़ ज़्यादा क्यों आती है?

January 16, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum