यदि आप थोड़ा-सा सजग हो जाएं तो पाएंगे कि हम सभी दुखी रहने के कई कारण सहज ही ढूंढ़ लेते...
हाल ही में उत्तर प्रदेश से एक ख़बर सामने आई है कि एक महिला के चतुर्थ श्रेणी कर्मी पति ने...
क्या आपने इस बात पर ग़ौर किया है कि एक भाषा की मृत्यु हो जाने या उसके खो जाने से...
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1972 में हुई थी. संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को पहली...
मनुष्य और जानवर में बुनियादी अंतर अक़्ल का ही होता है. मनुष्य सोच-समझ सकता है, अत: उससे हर मुद्दे पर...
देश के वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए क्या आपको लगता है कि क़ानून के सामने सभी लोग बराबर हैं? संविधान...
सवाल सीधा है कि क्या ईद पर आपको भी हामिद की याद आ जाती है? यदि आपका जवाब ‘हां’ है...
लोकतंत्र में जन सरोकारों को सत्ता तक पहुंचाने में व्यंग्य का बड़ी अहम् भूमिका होती है. व्यंग्य के ज़रिए सत्ता...
पुनर्जागरण काल में जब लोगों के भीतर मानवतावाद और तार्किक वैज्ञानिक खोजों पर बल देने वाली प्रवृत्ति जागृत हुई, तब...
रंगमंच यानी थिएटर को समाज का आईना कहा जाता है. पिछले दिनों 51वां विश्व रंगमंच दिवस मनाया गया. इस ख़ास...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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