‘कृषि के नारीवादी सिद्धांत’ को पाठकों से मिली सराहना, सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बाद, ‘महिला किसान’श्रृंखला में सामाजिक चिंतक, लेखक और...
‘महिला किसान’ इस श्रृंखला के पहले लेख में सामाजिक चिंतक, लेखक और दयाल सिंह कॉलेज, करनाल के पूर्व प्राचार्य डॉ...
कई आर्थिक और सामाजिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि कृषिप्रधान देश भारत में महिला कृषकों के बारे...
स्वतंत्रता दिवस केवल एक दिन मना लेना ही काफ़ी नहीं है. स्वतंत्रता के सही मायने समझने हैं तो हमें चाहिए...
जिस तरह की इन दिनों चर्चा चल निकली है यदि यह मान लें कि इतिहास के अप्रिय संदर्भों को हम...
कई बार हम यह जानते हुए भी कि हार जाएंगे, लड़ने की हुंकार सिर्फ़ इसलिए भरते हैं ताकि ख़ुद को...
एक बार किसी एकांत में जाकर, आंखें बंद कर के ख़ुद से पूछिए आप जिस राह चल निकले हैं वह...
समय-समय पर सत्ताधारी पार्टी के मुखिया, सांसद और नेता देश के अर्थशास्त्र को लेकर तरह-तरह के दावे करते रहते हैं....
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की गारंटी दी है कि यदि उन्हें चुना जाता है तो...
हमें पता ही नहीं चला कि कब बाज़ार के दबाव में अभिभावकों और बच्चों को एक ऐसे एजुकेशन सिस्टम का...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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