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ओए अफ़लातून
Home ज़ायका

तो अपने पसंदीदा दाल-चावल की कहानी को कितना जानते हैं आप?

कनुप्रिया गुप्ता by कनुप्रिया गुप्ता
March 18, 2022
in ज़ायका, फ़ूड प्लस
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हम कितने ही तरह के खाने पीने की चीज़ों बातें कर लें, दुनिया के किसी भी भाग में जाकर वहां का खाना खाकर आ जाएं, पर हम सबके लिए एक कोई भोजन होता है जो हमें घर के सुकून की याद दिलाता है या दुनियाभर का खाना खा लेने के बाद हमें उसकी याद सताने लगती है और आज हम यहां उसी देसी कम्फ़र्ट फ़ूड की बात कर रहे हैं, दाल चावल की बात कर रहे हैं.

 

कंफर्ट फ़ूड का हम सभी के जीवन में बहुत ज़रूरी स्थान है. अलग अलग लोगों के लिए ये अलग अलग व्यंजन हो सकते हैं. हो सकता है कोई कहे की उनके लिए ये कढ़ी चावल है, किसी दूसरे के लिए वो खिचड़ी हो, किसी और के लिए शायद चिप्स, चॉकलेट या पिज़्ज़ा भी हो सकता है. पिज़्ज़ा पढ़कर हंसिएगा नहीं, क्योंकि विश्व के एक बड़े हिस्से में, बड़ी संख्या में लोगों के लिए पिज़्ज़ा कंफ़र्ट फ़ूड है, पर आमतौर पर हम भारतीयों के लिए पिज़्ज़ा फ़न फ़ूड रहा है कंफ़र्ट फ़ूड बनने में शायद लम्बा समय लगे.
हां, तो हम बात कर रहे थे दाल चावल की. हमारे देश भारत का एक बड़ा हिस्सा, जो दाल चावल को अपने दैनिक भोजन का ही भाग मानता है और एक बार के भोजन में तीखा, मीठा या गरिष्ठ किसी तरह का भी खाना खा लेने के बाद अगली बार दाल चावल को ज़रूर याद करता है. देश के कई हिस्सों में दिन में कम से कम एक बार के भोजन में दाल चावल ज़रूर ही खाए जाते हैं. और जिन घरों में बच्चे हैं, वहां तो दाल चावल ज़रूर ही बन जाते हैं.
हम हमेशा से कहते रहे हैं भारत में हर प्रदेश में अलग अलग खानपान है. यहां तक कि एक ही प्रदेश में खानपान के अलग अलग व्यंजन या तौर-तरीक़े मिल जाते हैं, पर जब आप ग़ौर से देखेंगे तो पाएंगे की अगर एक कॉमन व्यंजन ढूंढ़ने की कोशिश की जाए तो दाल चावल ही एक ऐसा व्यंजन है, जो हर प्रदेश में खाया जाता है. हां, ये बात अलग हो सकती है कि दाल बनाने का ढंग अलग हो, उसमें बघार या तड़का लगाने का तरीक़ा भी अलग हो सकता है पर दाल चावल के मुरीद आपको पूरे भारत में मिलेंगे.

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जान लीजिए कि ये कहां से आए हैं?
आप कहेंगे दाल चावल कहां से आएंगे ये तो हमेशा से ही हमारे थे, इन्हें कौन लाएगा? हमने ही बनाना शुरू किए होंगे… बात तो सही है, दाल चावल पुराने जम्बू द्वीप का ही हिस्सा रहे हैं, पर सच ये है दाल चावल का इतिहास भारत से जुड़ा हुआ नहीं है. दाल चावल भारत को नेपाल की देन है. जी हां, दाल और चावल को अलग अलग पका कर और फिर मिलाकर खाने का चलन भारत में नेपाल से आया था.
दाल चावल सबसे पहले पहाड़ों की तराइयों में बनाए गए. आपको जानकार आश्चर्य होगा की पर्वतारोहियों में दाल चावल का चलन बहुत पुराना है. दाल चावल का भोजन उनमें इतना ज्यादा प्रचलित है कि कई बार किसी पहाड़ की ऊंचाई को वो इस बात से नापते हैं की उस ऊंचाई को पूरा करने में कितनी बार दाल चावल बनाकर खाने होंगे, जैसे- 2 दाल भात चढ़ाई या 4 दाल भात चढ़ाई… है ना दिलचस्प!
तो भारत पग पग पर अलग अलग स्वाद में मिलने वाले दाल चावल, भारत में नेपाल से आए और यहां आकर हर घर में इनका स्वाद बदलता चला गया.

रूप एक स्वाद और अनेक
दाल चावल का सिर्फ़ स्वाद ही नहीं बदलता इनके यार भी बदलते चले जाते हैं. कहने को आप कह सकते हैं दाल चावल ही तो हैं इनमे क्या बदलेगा? पर सच ये है कि खाने वाले दाल चावल को अपने अपने ढंग से खाते हैं, जैसे- बंगाल में लोग दाल चावल के साथ आलू पोस्तो या मछली खाते हैं, वहीं साउथ में भी लोग दाल चावल के साथ एक तरह की सूखी मछली शौक़ से खाते हैं. हमारे यहां उत्तर प्रदेश में दाल चावल के साथ बैंगन या आलू का चोखा खाया जाता है तो मध्यप्रदेश में कई जगह लोग दाल चावल के साथ आलू की सूखी सब्जी या जिसे भुजिया भी कहते हैं उसे खाना पसंद करते हैं. बाक़ी पापड़, अचार और चटनी तो इसके दोस्त हैं ही.
वहीं हर जगह दालभी कई अलग ढंग की खाई जाती है. अक्सर तो चावल के साथ तुअर की दाल ही खाई जाती है, पर मसूर , मूंग और उड़द दाल का प्रचलन भी आपको मिल ही जाएगा. दाल को तड़का लगाने के भी कितने ही तरीक़े आपको मिल जाएंगे. वैसे तो दाल पर पूरी तरह अलग से लम्बी बात हो सकती, है पर चावल के साथ खाई जाने वाली दाल की बात करे तो कई लोग बस उबली हुई दाल में नमक और हल्दी मिलकर चावल के साथ खाते हैं. गुजरात जाएंगे तो दाल में हरी मिर्च का तड़का लगेगा और उसमें मिलाया जाएगा गुड़ और निम्बू. राजस्थान में लाल मिर्च के तड़के वाली दाल को चावल के साथ खाया जाता है तो महाराष्ट्र में दाल में बस नमक हल्दी मिला दी जाती है या हल्का-सा हरी मिर्च का तड़का दाल में ऊपर से मिला दिया जाता है. मतलब दाल चावल एक ही व्यंजन होने के बाद भी हर बार उसे अलग स्वाद के साथ खाया जा सकता है.

दाल चावल की बातें
मैं अगर अपनी बात करूं तो जिस दिन बहुत भूख लगी होती या अच्छे से खाना खाने का मन होता है तो सब्ज़ी रोटी के साथ थोड़ा दाल चावल खा लूं तो ऐसा लगता है, जैसे मन और पेट दोनों भर गए वरना यूं महसूस होता है, जैसे कुछ कुछ अधूरा सा है. हमारे मालवा में दाल चावल के साथ पापड़ चुरी और प्याज़ और सेंव मिलकर खाने वाले लोग आपको कई मिल जाएंगे.
मैं अपनी ही बात करूं तो दाल (प्याज़, टमाटर हरी मिर्च से बघार लगाई हुई) चावल में कटे हुए प्याज़ (जिनमें नमक और चाट मसाला मिला हो ) या कचूमर सलाद मिलाकर खाना मेरे लिए स्वार्गिक आनंद के बराबर है, बाक़ी पापड़ और अचार तो सोने पर सुहागा है ही! हां, एक बात है हाथ से दाल चावल खाना मेरे बस की बात नहीं…अब आप लोग मुझे ‘जज’ मत करते बैठ जाइएगा, क्योंकि आप अगर मेरे सामने हाथों से दाल चावल खाने बैठेंगे तो मैं आपको ‘जज’ नहीं बिल्कुल
अच्छा अब जल्दी से इस आईडी: oye.aflatoon@gmail.com, पर बताइएगा किआपको किस तरह से दाल चावल खाना पसंद है? हम फिर जल्द ही मिलेंगे अगले किसी व्यंजन के साथ…

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

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कनुप्रिया गुप्ता

कनुप्रिया गुप्ता

ऐड्वर्टाइज़िंग में मास्टर्स और बैंकिंग में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा लेने वाली कनुप्रिया बतौर पीआर मैनेजर, मार्केटिंग और डिजिटल मीडिया (सोशल मीडिया मैनेजमेंट) काम कर चुकी हैं. उन्होंने विज्ञापन एजेंसी में कॉपी राइटिंग भी की है और बैंकिंग सेक्टर में भी काम कर चुकी हैं. उनके कई आर्टिकल्स व कविताएं कई नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं. फ़िलहाल वे एक होमस्कूलर बेटे की मां हैं और पैरेंटिंग पर लिखती हैं. इन दिनों खानपान पर लिखी उनकी फ़ेसबुक पोस्ट्स बहुत पसंद की जा रही हैं. Email: guptakanu17@gmail.com

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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