• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home ओए हीरो

आख़िरी पत्ता नहीं, बचा हुआ एक पत्ता यानी और पत्तों की उम्मीद!

ज्योति जैन by ज्योति जैन
January 21, 2022
in ओए हीरो, ज़रूर पढ़ें, मेरी डायरी
A A
आख़िरी पत्ता नहीं, बचा हुआ एक पत्ता यानी और पत्तों की उम्मीद!
Share on FacebookShare on Twitter

यह एक ऐसा अभूतपूर्व समय है, जिसने पूरी मानव जाति को कई बातें सिखाईं, वो बातें, जिन्हें हमें शायद पहले ही सीख लेना चाहिए था. पर कहते हैं न जब आंख खुले तभी सवेरा. कोरोना काल में ख़ुद को और औरों को सकारात्मक बनाए रखना सबसे कारगर तरीक़ा है. और ज्योति जैन की डायरी में दर्ज ये अनुभव आपको भी सकारात्मक बनाए रखेगा.

 

यूं तो मैं आम दिनों में भी अपनी पसंद के सारे काम कर लेती हूं, पर फ़िलहाल के लॉकडाउन में चूंकि बाहर नहीं जाना होता, सो और अतिरिक्त कार्य भी हो जाते हैं, जिनमें बागवानी भी शामिल है. इन दिनों माली भैया नहीं आ रहे, सो पुराने सीज़नल पौधों के सूखते चले गमलों में नए रोपे लगाने बैठी थी. मुझे ध्यान आया कि पिछले दिनों चौकोर गमला माली ने एक ओर रख दिया था, ये कहकर कि उसकी वॉटर लिली सूखकर ख़त्म हो चुकी है. वो मेरा पसंदीदा पौधा है. वॉटर लिली ज़रा-से में फैलकर अपने छोटे-छोटे गोल पत्तों से गमले की सुन्दरता और बढ़ा देती है. मैंने सबसे पहले वही गमला हाथ में लिया. वॉटर लिली सूख चुकी थी.

इन्हें भीपढ़ें

Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026

पर ये क्या…! एक बिल्कुल नन्ही सी, गोल पत्ती उस सूखी मिट्टी से झांक रही थी. मैंने फौरन उसमें पानी डाला. पिछले दस दिन से उसमें पानी बराबर दे रही हूं और आज… उसमें सात पत्तियां निकल आई हैं. और भी कई बिलकुल बूंद जैसी पत्तियां मिट्टी को चीर बाहर आने को उद्यत है. जीजिविषा का एक श्रेष्ठ नमूना…
वर्तमान हालात् के मद्देनज़र ये पूरा वाक़या यूं लगा कि हम ये न सोचें कि ये आख़िरी पत्ता है, बल्कि ये सोचें कि ये वो शुरुआती पत्ता है, जो समय के साथ पूरा गमला हरियाली से भर देगा. यही तो जीवन है!

हम घर में तमाम सुख-सुविधाओं के बाद भी छटपटा रहे हैं… बीमारी का डर कहीं न कहीं इस पत्ते को आख़िरी पत्ता समझ लेने पर मजबूर कर रहा है. लेकिन अपनी ओर से अपने अच्छे कर्म करते रहें. यथासंभव औरों की मदद करते रहें तो नैराश्य के काले बादल छटकर उम्मीदों की किरण अवश्य अपनी ऊर्जा प्रदान करेंगी. हमारे सद्कर्म व सकारात्मकता ही सुख और शांति का उद्गम स्थल हैं. और यही आख़िरी पत्ते को पहला पत्ता बनाते हैं.

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

 

 

Tags: Covid experiencediaryHeroesHopejyoti jainleaf of hopePositive experiences of Corana periodआस का पत्ताउम्मीदकोराना काल के सकारात्मक अनुभवकोविड अनुभवज्योति जैनडायरीहीरोज़
ज्योति जैन

ज्योति जैन

ज्योति जैन के तीन लघुकथा संग्रह, तीन कहानी संग्रह, तीन कविता संग्रह, एक आलेख संग्रह और एक यात्रा वृत्त प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ऑथर्स, वामा साहित्य मंच के पांच संग्रहों का संपादन भी किया है. उनके लघुकथा संग्रह का मराठी, बांग्ला और अंग्रज़ी में अनुवाद हो चुका है. उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें सृजनशिल्पी, श्रीमती शारदा देवी पांडेय स्मृति सम्मान, माहेश्वरी सम्मान, अखिल भारतीय कथा सम्मान भी शामिल हैं. वर्तमान में वे डिज़ाइन, मीडिया व मैनेजमेंट कॉलेज में अतिथि व्याख्याता हैं.

Related Posts

epstein-file
ज़रूर पढ़ें

एप्स्टीन फ़ाइल खुलासे के बाद: दुनिया के इन 20 फ़ीसदी लोगों को मेरा सलाम

February 4, 2026
ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन
ज़रूर पढ़ें

ये कहना कि महात्मा गांधी भारत के विभाजन से सहमत हो गए थे, उनकी यादों के साथ सरासर अन्याय है: लॉर्ड माउंटबेटन

January 30, 2026
गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे
ज़रूर पढ़ें

गंगा कभी मैली नहीं होगी, गांधी कभी नहीं मरेंगे

January 29, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum