• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home ज़रूर पढ़ें

इस अग्निपथ पर सुलग रहे हैं कई व्यावहारिक सवाल

सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
June 17, 2022
in ज़रूर पढ़ें, नज़रिया, सुर्ख़ियों में
A A
agnipath-scheme
Share on FacebookShare on Twitter

हाल ही में केंद्र सरकार ने सेना में सैनिकों की भर्ती के लिए नई योजना की घोषणा की है, जिसका नाम है अग्निपथ. इस योजना के तहत चार साल के लिए भर्ती पाने वाले सैनिकों को अग्निवीर नाम दिया गया है. कहीं यह योजना जल्दबाज़ी में तो नहीं लाई गई? क्या वजह है कि इसे अग्निपथ नाम दिया गया होगा? क्या दूसरे ज़रूरी कामों को करते हुए देश के लिए जान देने वाले युवा अग्निवीर नहीं हैं? क्या इस योजना से वो वर्ग ख़ुश है, जिन्हें इससे नौकरी मिलेगी? इन सभी बातों को अपने आलेख में समेटा है जानेमाने पत्रकार, साहित्यकार प्रियदर्शन ने.

 

हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘अग्निपथ’ मेरी प्रिय कविताओं में रही. ख़ासकर इसका अंतिम हिस्सा मुझे हमेशा छूता रहा- यह महान दृश्य है, ‘चल रहा मनुष्य है, अश्रु-स्वेद कण से लथपथ, लथपथ, लथपथ.’ इन पंक्तियों और इस कविता से मेरे लगाव को ‘अग्निपथ’ नाम से बनी दो बहुत मामूली- और कुछ मायनों में वाहियात- फ़िल्में भी कम नहीं कर पाईं. दरअसल, हरिवंश राय बच्चन का विद्रोही रूप मुझे हमेशा से लुभाता रहा. हालावादी कवि के रूप में उनकी शोहरत ने जैसे उनके इस वास्तविक रूप को सामने आने नहीं दिया, वरना उनके तेवर बहुत अलग रहे- ‘प्रार्थना मत कर, मत कर, मत कर, मनुज पराजय के स्मारक हैं, मंदिर मस्जिद गिरजाघर’ जैसी पंक्ति उन जैसा कवि ही लिख सकता था. यह अलग बात है कि हर बात पर अपने बाबूजी का पुण्य स्मरण करने वाले अमिताभ बच्चन बात-बात पर सिद्धिविनायक मंदिर में माथा टेकते नज़र आते हैं.

बहरहाल, यह टिप्पणी न हरिवंश राय बच्चन पर है, न अमिताभ बच्चन पर और न ही अग्निपथ नाम की कविता पर. यह चार साल के लिए सैनिकों की भर्ती की उस नई योजना पर है जिसका नाम न जाने क्यों ‘अग्निपथ’ रखा गया है और जिसके गुण-दोष के बारे में मेरी कोई स्पष्ट राय नहीं है. लेकिन कुछ बातें हैं जिनकी वजह से यह टिप्पणी ज़रूरी लग रही है.

इन्हें भीपढ़ें

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
kalpana-lajmi_bhupen-hazarika

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
किताब उत्सव: साहित्य, संगीत और रंगमंच की प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन

किताब उत्सव: साहित्य, संगीत और रंगमंच की प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन

February 11, 2026
धुनों पर गीत लिखना एक रचनात्मक सुविधा: गुलज़ार

धुनों पर गीत लिखना एक रचनात्मक सुविधा: गुलज़ार

February 10, 2026

पहली बात तो यह कि सेना में भर्ती की एक योजना का नाम ‘अग्निपथ’ क्यों? इसे सैन्यपथ, सुरक्षा पथ, वीरपथ, साहसपथ जैसे कई नाम दिए जा सकते थे. संभव है, योजनाकारों को लगा होगा कि ‘अग्निपथ’ एक आकर्षक नाम है जिसकी बदौलत युवाओं को सेना की ओर आकृष्ट किया जा सकता है. लेकिन क्या भारतीय सेना को ऐसी किसी आकर्षक पैकेजिंग की ज़रूरत है? भारत में यों ही सेना का सम्मान बहुत है. इसकी एक वजह यह भी है कि वह राजनीति से दूर खड़ी है और पूरी तरह राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात मानी जाती है. हालांकि राजनीतिक विडंबनाएं उसका काम और स्वभाव कई बार बदलती दिखती हैं, कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक और कई दूसरे इलाकों में उसकी भूमिका से स्थानीय लोगों की नाराज़गी भी दिखती है, कई बार इच्छा होती है कि काश उसकी वर्दी पर कहीं भी मानवाधिकार हनन के दाग़ न लगें, लेकिन इसके बावजूद कुल मिलाकर अनुशासन, मर्यादा और गरिमा में भारतीय सेना एक उदाहरण प्रस्तुत करती है. ‘अग्निपथ’ जैसा रोमानी नाम उसकी गरिमा कम करने वाला है. इस नाम से जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के नाटक ‘आर्म्स ऐंड द मैन’ की याद आती है. करीब सवा सौ साल पहले लिखे हुए इस नाटक में सर्बिया का भगोड़ा कैप्टन ब्लंट्श्ली उस सर्जियस का मज़ाक बनाता है, जिसे उसकी प्रेमिका रैना बहुत बड़ा हीरो मानती है. वह उसे ‘चॉकलेट क्रीम सोल्जर’ कहता है. कभी वह लापरवाही में कहता है कि दस में से नौ सैनिक मूर्ख होते हैं. दरअसल, वह कहना यह चाहता है कि युद्ध वीरता की किसी रोमानी कल्पना से नहीं जीते जाते, उनके पीछे रणनीति, तैयारी और युद्ध कौशल होता है. ‘अग्निपथ’ वीरता की इसी रोमानी कल्पना को बढ़ावा देने वाला नाम है.

दूसरा चिंतनीय पहलू यह है कि यह नाम ‘अग्निपथ’ सेना में एक पेशागत श्रेष्ठता का भाव भरता है जिसकी वजह से जीवन के दूसरे और कहीं ज़्यादा वास्तविक ‘अग्निपथ’ अनदेखे रह जाते हैं. मसलन इस देश में जो लोग सीवर सिस्टम में उतर कर सफ़ाई करते हैं, वे असली अग्निवीर हैं. कई बार उनकी जान चली जाती है. लेकिन उन्हें कोई शहीद नहीं मानता, जबकि काम वे देश के ही आते हैं. इसी तरह बहुमंज़िला इमारतों में काम करने वाले मज़दूर जिन हालात में काम को मजबूर होते हैं, असली अग्निवीर वे भी हैं. ऐसे बहुत सारे पेशे हैं, जिनकी चुनौती बिल्कुल आग से खेलने जैसी है. दरअसल हमारे यहां जो जातिगत विभाजन है, जिसकी श्रेष्ठता का आधार पेशागत श्रेष्ठता में बदल दिया जाता है, उसी से सेना में चार साल की भर्ती अग्निपथ बताने की मानसिकता भी निकली है.

एक और बात यह है कि इस देश की श्रम शक्ति कई स्तरों पर शोषण झेल रही है. सरकारी नौकरियां भी घटी हैं और उनकी सहूलियतें भी, जबकि ख़ुद को ईमानदार और पेशेवर बताने वाला निजी क्षेत्र नौकरियों के मामले में सबसे ज़्यादा अनैतिक है. वहां योग्यता से ज़्यादा जान-पहचान चलती है और यह जान-पहचान अक्सर अपने वर्ग और अपनी जाति के दायरे में होती है. वहां नौकरियां बॉस की मर्ज़ी पर चलती हैं, काम के घंटे तय नहीं होते और पेंशन जैसी कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं दिखती. वहां नौकरियों में ठेका चलता है जिसमें कर्मचारियों की स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं होती, उन्हें बॉस की वफ़ादारी के भरोसे रहना पड़ता है. सेना का ‘अग्निपथ’ भी सरकारी होते हुए अपने चरित्र में निजी क्षेत्र जैसा है. यह एक पूरी प्रवृत्ति का विस्तार है जिसमें श्रमिक ज़्यादा से ज़्यादा लाचार होते चले गए हैं.

तीसरी बात यह कि अग्निपथ को लेकर कल से जो विरोध प्रदर्शन जारी है, उसको लेकर सरकार और समाज का रवैया देखने लायक है. बीते शुक्रवार को ही कई शहरों में प्रदर्शन हुए, कहीं छिटपुट हिंसा भी हुई, लेकिन उनको लेकर सरकारी तंत्र और बहुसंख्यक समाज का जो ग़ुस्सा दिखा, वह इस गुरुवार को पूरी तरह ग़ायब है. शुक्रवार के बाद लड़कों को थानों में बंद कर उनकी पिटाई करते हुए वीडियो बनाए गए, जिन्हें मंत्रियों ने प्रदर्शनकारियों का रिटर्न गिफ़्ट बताया. इतवार आते-आते घरों पर बुलडोज़र चलने लगे. इस देश के तथाकथित लोकतांत्रिक लोग इसे सही मानते हुए बताते रहे कि इन्होंने देश की सार्वजनिक संपत्ति बरबाद की है, पथराव किया है.

लेकिन अब जब ‘अग्निपथ’ के ख़िलाफ़ बहुत सारे संभावित अग्निवीर ही खड़े हो गए हैं और वे गाड़ी से लेकर रेलगाड़ी तक में आग लगा रहे हैं, तब सार्वजनिक संपत्ति और सार्वजनिक व्यवस्था के नुक़सान पर आक्रोश जताने वाले कहां हैं? क्या वे अब भी यह मानते हैं कि इन हुड़दंगियों का भी रिटर्न गिफ़्ट पैक बनाया जाना चाहिए और इनके घरों में बुलडोज़र चलाया जाना चाहिए?

दरअसल, देश ऐसे नहीं चलते. उन्हें विधान और संविधान के हिसाब से चलना चाहिए, लेकिन विधान और संविधान का इस्तेमाल अगर आप अपनी खुन्नस निकालने के लिए करते हैं, अगर अपने सांप्रदायिक पूर्वग्रहों की संतुष्टि के लिए करते हैं, अगर प्रतिशोध की राजनीति के लिए करते हैं तो आप देश को भी कमज़ोर करते हैं और संविधान को भी.

निस्संदेह जो लोग आज भी सड़कों पर उतर तरह-तरह से अपनी हताशा व्यक्त कर रहे हैं, उन पर बुलडोज़र चलाने की नहीं, उनका दुख समझे जाने की ज़रूरत है. अरसे से अटकी पड़ी सरकारी नौकरियों के लिए उनकी उम्र जा चुकी, सेना में नियुक्ति के लिए अगर वे प्रशिक्षण या कोचिंग पर अपने साधन लगा चुके हैं तो वे बेकार साबित हो रहे हैं और एक अनिश्चित भविष्य उनके लिए अग्निपथ बना हुआ है. कमोबेश यही बात बीते शुक्रवार के प्रदर्शनकारियों के बारे में कही जा सकती है. दरअसल, तीन कृषि क़ानूनों के बाद इस अग्निपथ ने बताया है कि सरकार के ऐसे फ़ैसलों से न किसान खुश हैं, न नौजवान. क्या प्रधानमंत्री को इस बार भी देर-सबेर मानना पड़ेगा कि उनकी तपस्या में कुछ कमी रह गई?

फ़िलहाल तो यही लग रहा है कि इस देश की लोकतांत्रिक तपस्या में कोई कमी रह गई है. वरना न बीता शुक्रवार होता, न मौजूदा गुरुवार आता. और इससे बढ़ कर ऐसी सरकार नहीं होती जो अपने ही लोगों के घरों पर बुलडोज़र चला कर ख़ुश होती.

 

साभार: ndtv.in

Tags: Agnipath schemeAgniveerRecruitment of soldiersअग्निपथ योजनाअग्निवीरसैनिकों की भर्ती
टीम अफ़लातून

टीम अफ़लातून

हिंदी में स्तरीय और सामयिक आलेखों को हम आपके लिए संजो रहे हैं, ताकि आप अपनी भाषा में लाइफ़स्टाइल से जुड़ी नई बातों को नए नज़रिए से जान और समझ सकें. इस काम में हमें सहयोग करने के लिए डोनेट करें.

Related Posts

किताब उत्सव: लोकार्पण, चर्चाओं और रोचक प्रस्तुतियों से भरा तीसरा दिन
सुर्ख़ियों में

किताब उत्सव: लोकार्पण, चर्चाओं और रोचक प्रस्तुतियों से भरा तीसरा दिन

February 9, 2026
मुम्बई किताब उत्सव: नौ सत्रों के नाम रहा दूसरा दिन
सुर्ख़ियों में

मुम्बई किताब उत्सव: नौ सत्रों के नाम रहा दूसरा दिन

February 8, 2026
मुम्बई में 10 फ़रवरी तक चलेगा राजकमल प्रकाशन समूह का किताब उत्सव
सुर्ख़ियों में

मुम्बई में 10 फ़रवरी तक चलेगा राजकमल प्रकाशन समूह का किताब उत्सव

February 7, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum