अपनी केवल धार: अरुण कमल की कविता
वरिष्ठ साहित्यकार अरुण कमल की कविता ‘धार’ मेहनतकश वर्ग की ज़िंदगी की कहानी कहती है. साथ ही कवि यह भी ...
वरिष्ठ साहित्यकार अरुण कमल की कविता ‘धार’ मेहनतकश वर्ग की ज़िंदगी की कहानी कहती है. साथ ही कवि यह भी ...
उदासी में एक संवेदना होती है. यह संवेदना बनी रहनी चाहिए, पर कुछ लोग आपसे आपकी उदासी छीन लेना चाहते ...
अपने अंदर आए बदलावों का दोष दूसरों पर मढ़नेवालों को आईना दिखाती है, कुंवर बेचैन की कविता ‘लोहे ने कब ...
एक औरत के जितना सामंजस्य बिठाकर भला और कौन चल सकता है. अपने पहले राजकीय प्रवास पर गई औरत के ...
ज़िंदगी का मज़ा उसके आसान होने में नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में किए संघर्ष में है. मैं तूफ़ानों में ...
सतत चलती रहनेवाली, बहती रहनेवाली नदी भी सुस्ताना चाहती है. बिल्कुल एक कविता की तरह. गुलज़ार साहब की कविता ‘एक ...
महिला वेदना और मुद्दों को आवाज़ देनेवाली कवयित्री निर्मला पुतुल उस पुरुषवादी समाज से सवाल कर रही हैं, जिसका मानना ...
बिना सोचे-समझे बोलनेवालों और ख़ुद को बहुत कुछ समझनेवालों के लिए अपनी आज़माइश करने के पैमाने तय करती दिवंगत राहत ...
कविता को नया स्वर देनेवाला निराला की यह कविता किसान-मज़दूर वर्ग की वेदना बादलों तक पहुंचाने का काम करती है. ...
‘खांटी घरेलू औरत’ लेखिका-कवयित्री ममता कालिया की गृहणियों के लिए समर्पित कविताओं की श्रृंखला है. आम महिलाओं-गृणियों की ज़िंदगी आम ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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