हम कविता नहीं करते: वंदना टेटे की कविता
मौजूदा आदिवासी साहित्य का जाना-माना चेहरा वंदना टेटे की यह कविता आदिवासी जीवन की ख़ूबसूरती का बखान करती है. प्रकृति ...
मौजूदा आदिवासी साहित्य का जाना-माना चेहरा वंदना टेटे की यह कविता आदिवासी जीवन की ख़ूबसूरती का बखान करती है. प्रकृति ...
कहते हैं, कविताएं चित्र होती हैं. दीपावली के कुछ चित्रों के बारे में ख़ुद कवि अरुण चन्द्र रॉय बताते हुए ...
ज्ञान प्राप्ति के लिए रात के अंधेरे में घर-परिवार त्याग देनेवाले युवराज सिद्धार्थ की शोकाकुल पत्नी यशोधरा अपने मन की ...
पतंग के बहाने कवि आलोक धन्वा बालसुलभ इच्छाओं का सुंदर चित्रण करते हैं. पतंग की ऊंचाइयों के माध्यम से बालमन ...
दिनों-दिन प्रकृति के साथ मनुष्य के टूट रहे रिश्ते की सटीक व्याख्या करती है रघुवीर सहाय की कविता ‘वसंत आया’. ...
फ़िलॉसफ़र कवि और गीतकार गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ के लेखन की विधा ही अनूठी थी. उनके लिखे के एक सिरे से ...
दुष्यंत कुमार की मशहूर ग़ज़ल ‘मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं’ की पंक्तियां ‘तू किसी रेल-सी गुज़रती है, मैं किसी पुल-सा ...
घर होने और न होने के क्या मायने होते हैं? घर शीर्षक से लिखी अज्ञेय की इन पांच कविताओं को ...
अगर आप शक्तिशाली हैं तो दूसरों के अधिकारों को न छीनें, उनकी दुनिया में अतिक्रमण न करें. सूरज को शक्ति ...
जैसे-जैसे इंसान शिक्षित और सभ्य हुआ उसने बुराई और बेइज़्ज़ती करने की ऐसी कूटभाषा विकसित कर ली, जिसे समझते सब ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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