संबल ज़िंदगी के: पूनम अहमद की लघु कथा
जब ज़िंदगी हमारे सामने अचानक कोई ऐसी कमी पैदा कर देती है, जिसकी भरपाई संभव न हो तो क्या बड़े ...
जब ज़िंदगी हमारे सामने अचानक कोई ऐसी कमी पैदा कर देती है, जिसकी भरपाई संभव न हो तो क्या बड़े ...
कलम और कट्टे के बीच जंग हो तो क्या होता है? कलम जीतती है या कट्टा? मुन्ना भाई और शिव ...
जहां कुछ यादें बचपन की ओर लौटा ले जाती हैं, वहीं कुछ बचपन की यादें हमेशा साथ रहती हैं और ...
यदि आपके भीतर कुछ कर गुज़रने का आत्मविश्वास है तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी, अंधेरी से अंधेरी राहों ...
कई बार हम केवल आसपास की चीज़ों को ग़ौर से देखभर लेने पर स्वप्रेरणा से इतना कुछ कर जाते हैं. ...
कई बार हम जिन कामों को करना चाहते हैं और जानते हैं कि इसे करना हमारा कर्तव्य है, पर फिर ...
कई बार जो लोग ऊपर से सख़्त और बेहद अजीब नज़र आते हैं, दरअसल ऐसे नहीं होते. इंसानियत पर विश्वास ...
देवी पूजा के अलग-अलग तरीक़ों के बीच कई बार पुरानी और नई सोच का टकराव हो ही जाता है, लेकिन ...
ज़िंदगी कब, किस मोड़ पर ला खड़ा करेगी, हममें से कोई नहीं जानता. इस कथा का नायक मयंक गहरे दुखों, ...
जब शाम पकी हुई हो, सबकुछ गड़बड़झाल हो, आपके मन की एक न सुनी जा रही हो तो क्या किया ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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