बस्ती में है वो सन्नाटा जंगल मात लगे: क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर
क़ैसर-उल ज़ाफ़री की यह शायरी प्रतीकों और विरोधाभासों के साथ ख़ूबसूरती से खेलते हुए सीधे दिल में उतर जाती है. ...
क़ैसर-उल ज़ाफ़री की यह शायरी प्रतीकों और विरोधाभासों के साथ ख़ूबसूरती से खेलते हुए सीधे दिल में उतर जाती है. ...
बच्चे के लिए मां का कोई एक रूप नहीं होता. वह मां को हर रूप में देख सकता है. जैसे ...
उर्दू शायरी प्रेम की विसंगतियों को एक कसक के साथ जताने के लिए जाती है. इसी परंपरा का पालन कर ...
पाकिस्तानी शायर तहज़ीब हाफ़ी की ग़ज़ल ‘पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊंगा’ ख़ुद से किए जानेवाले वादों की फ़ेहरिस्त है. ...
पत्रकार-लेखक-कवि कैलाश सेंगर उम्दा ग़ज़लकार थे. उनकी ग़ज़लों के शेर आम आदमी के दर्द को बयां करते हैं. उनका लेखन ...
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां लिखनेवाले अल्लामा इक़बाल की शायरी में गहरे विचार, उपमाओं और रूपकों की कमी नहीं होती ...
‘जब उस की तस्वीर बनाया करता था’ पाकिस्तान के मशहूर शायर तहज़ीब हाफ़ी की ग़ज़ल है. तहज़ीब अपनी प्रेम शायरियों ...
ताजमहल, जिसे दुनिया अमर प्रेम की निशानी मानती है, उसे देखकर एक कवि के मन में क्या ख़्याल आ सकते ...
प्यार, वफ़ा, बेवफ़ाई और अकेलेपन को बयां करते क़ैसर-उल ज़ाफ़री के शेर, पढ़कर बरबस मुंह से ‘वाह, वाह’ ज़रूर निकलेगा. ...
ग़ुलाम अली की जादुई आवाज़ में हम सभी ने इब्ने इंशा की यह ग़ज़ल कई बार सुनी होगी. आज ख़ुद ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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