बीमारी: अनूप मणि त्रिपाठी की लघुकथा
हमारा दिल भले ही कितना भी सख़्त क्यों न हो जाए, पर शरीर के दूसरे अंगों का संवेनशील होना बताता ...
हमारा दिल भले ही कितना भी सख़्त क्यों न हो जाए, पर शरीर के दूसरे अंगों का संवेनशील होना बताता ...
क्या प्रेम का अन्त कहानियों की तरह विवाह में ही होना आवश्यक है? इस सवाल के इर्दगिर्द बुनी गई एक ...
हम भयंकर अंतरविरोध वाले समाज में रहते हैं, बता रही है हरिशंकर परसाई की कहानी ‘प्रेम-पत्र और हेडमास्टर’. गुरु लोगों ...
वो प्यार ही क्या जिसमें दर्द ना हो? वो हसरतें ही क्या, जो आसानी से पूरी हो जाएं? वह जीवन ...
बेकरी में आटा गूंधनेवाले 26 आदमियों और उनसे रोज़ाना मिलनेवाली तानिया नामक लड़की की दिलचस्प दास्तां है मैक्सिम गोर्की की ...
समय के साथ रिश्ते भी बदल सकते हैं, बता रही है महीप सिंह की रचना ‘काला बाप गोरा बाप’. अपनी ...
किसान और किसानी की दुर्दशा पर मुंशी प्रेमचंद से ज़्यादा भला किसने लिखा होगा. कहानी बलिदान भले ही आज़ादी के ...
कहानी अच्छे-ख़ासे पढ़े लिखे पुरुषों को अपने इशारे पर नचानेवाली मीरा की. क्या होता है उस रोज़ सड़क पर, जो ...
कुछ बातें, कुछ घटनाएं और कुछ लोग हमारे मन को कुछ इस क़दर छू जाते हैं कि हम अपनी एक ...
हमारे कई पाठकों और लेखकों को फ़िक्शन अफ़लातून प्रतियोगिता के बारे में देर से मालूम हुआ, जिसकी वजह से उनके ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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