तीसरी कसम: जो फ़िल्म नहीं सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी
साल के किसी महीने का शायद ही कोई शुक्रवार ऐसा जाता हो जब कोई न कोई हिंदी फ़िल्म सिने पर्दे...
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साल के किसी महीने का शायद ही कोई शुक्रवार ऐसा जाता हो जब कोई न कोई हिंदी फ़िल्म सिने पर्दे...
इन दिनों अमरूद बहुतायत में आ रहे हैं. आप एक फल की तरह तो इसका आनंद ले ही सकते हैं,...
ये बात तो हम सभी जानते हैं कि अच्छी नींद हमारी सेहत के लिए कितनी ज़रूरी है. लेकिन यदि आप...
बात घरेलू नुस्ख़ों की आए तो किचन में मौजूद हल्दी आपका बख़ूबी साथ निभाती है. इसका उल्लेख दादी मां के...
बच्चा चाहे एक हो या फिर ज़्यादा, उनकी परवरिश करने में पैरेंट्स को एक जैसे अनुभव, समस्याएं, कठिनाइयां होती हैं....
तो आप सलाद खाना चाहती हैं, लेकिन आपको सलाद खाने में मज़ा नहीं आता, है ना? तो किसने कहा है...
छब्बीस जनवरी 1950 को भारत एक गणतंत्र राष्ट्र बन गया. उसे दिन के महत्व को बताने-समझाने के लिए कई कवियों...
संविधान में मिले तमाम अधिकारों के बावजूद आम आदमी को यहां-वहां भटकना पड़ रहा है. इस हक़ीक़त को बयां कर...
यदि आप आलू के स्वाद के दीवाने/दीवानी हैं तो आपको यह स्विस डिश बेहद पसंद आएगी, जिसका नाम है पोटैटो...
जवान बेटे की मौत से भला कौन दुखी नहीं होगा, पर समाज को दुख से ज़्यादा दुख के प्रदर्शन की...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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