फ़िक्शन अफ़लातून#9 सेल्फ़ी (लेखिका: डॉ अनिता राठौर मंजरी)
बदलाव की चाह में किसी महिला और पुरुष के बीच आकर्षण अस्वाभाविक नहीं है, फिर चाहे उनके बीच उम्र का...
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बदलाव की चाह में किसी महिला और पुरुष के बीच आकर्षण अस्वाभाविक नहीं है, फिर चाहे उनके बीच उम्र का...
आगामी 24 मार्च और 25 मार्च को दिल्ली में ITO के नजदीक सुरजीत भवन में पहले वैखरी का आयोजन होने...
यह कहानी है एक बिन मां की लड़की की, जिसका बचपन और यौवन दोनों ही मुश्क़िल रहे. प्यार की तलाश...
डिज़्नी हॉटस्टार पर हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म गुलमोहर के बारे में भारती पंडित का कहना है कि इस...
कई बार जाने, अनजाने हम अपने आप पर घमंड करने लग जाते हैं. हमें लगता है कि हम बहुत अच्छे...
हिंदी भाषा को तकनीक के साथ जुड़ता देखना बहुत संतुष्टि देता है. और वे लोग, जो अपनी मातृभाषा से जुड़ा...
किसी महिला के आज़ाद ख़याल होने का यह अर्थ लगाना कि वह पारिवारिक मूल्यों को नहीं समझती होगी, बेहद हल्की...
लड़की वह पौधा है, जिसे एक जगह अपनी जड़ें जमाने के सालों बाद, उखड़ाकर दूसरी जगह रोप दिया जाता है....
कुछ चीज़ें अपने साथ यादों की पोटली लेकर चलती हैं. कहानी प्रतियोगिता फ़िक्शन अफ़लातून में लेखिका राजुल अशोक की इस...
जब हमें अपने ऊपर पूरा भरोसा होता है तो कोई भी हमारे इरादों को डिगा नहीं सकता, फिर चाहे परिस्थितियां...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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