आख़िर क्या है जीवन का मक़सद?
क्या आपको भी लगता है कि ज़िंदगी में कोई मज़ा नहीं है, रस नहीं है? तो फिर आपको जाने-माने गांधीवादी ...
क्या आपको भी लगता है कि ज़िंदगी में कोई मज़ा नहीं है, रस नहीं है? तो फिर आपको जाने-माने गांधीवादी ...
जानेमाने गांधीवादी व समाजसेवी हिमांशु कुमार की इतिहास को लेकर अपनी हाई स्कूल में पढ़ने वाली बेटी से हुई चर्चा ...
इन दिनों लोकतंत्र का शतरंज किस तरह खेला जा रहा है, कैसे केवल अफ़वाह या नासमझी के आधार पर अपने ...
यदि आप थोड़ा-सा सजग हो जाएं तो पाएंगे कि हम सभी दुखी रहने के कई कारण सहज ही ढूंढ़ लेते ...
जानेमाने समाजसेवी व गांधीवादी हिमांशु कुमार की यह कविता मॉब लिंचिंग की ओर ध्यान आकर्षित कराती है. इस संवेदनशील कविता ...
मनुष्य और जानवर में बुनियादी अंतर अक़्ल का ही होता है. मनुष्य सोच-समझ सकता है, अत: उससे हर मुद्दे पर ...
अमूमन हमारा मन बहुत सी बातें सोचता है. इनमें से कई बार वह ऐसी बातें भी सोचता है, जो मुमकिन ...
हमें दूसरों की कमियां तुरंत दिखाई दे जाती है और हम उस पर चर्चा भी करते हैं. लेकिन इस चर्चा ...
पूंजी और पूंजीवाद किस तरह आम लोगों के जीवन पर प्रभाव डालता है, किस तरह उसकी गिरफ़्त में सिस्टम आ ...
अक्सर हमारे देश के समृद्ध लोगों का यह कहना कि वे ग़ैर राजनीतिक हैं, यही बात उनकी अवसरवादिता का सबसे ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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