आत्मत्राण: रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर कविता ‘आत्मत्राण’ में ईश्वर से बात कर रहे हैं. वे ईश्वर से दुख, हानि, मुसीबत आदि से ...
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर कविता ‘आत्मत्राण’ में ईश्वर से बात कर रहे हैं. वे ईश्वर से दुख, हानि, मुसीबत आदि से ...
हाल के समय में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सड़कों पर तेज़ी से दौड़ रहे, तोड़-फोड़ कर रहे और ...
चाहे लाख कोशिश कर लें संघर्ष करके अपने बूते पर सफलता हासिल करनेवालों को कोई हरा नहीं सकता. ऐसे ही ...
हर बीतते दिन के साथ हम कहते हैं कि दुनिया बदल रही है और यहां जीना कठिन होता जा रहा ...
बीते हुए समय की सुखद यादों को पकड़कर रखने से वर्तमान का दुख और भी बढ़ जाता है. आप चाह ...
छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान से सुंदर और सुकूनदायक और क्या हो सकता है? बाबा नागार्जुन की कविता यह दंतुरित ...
वक़्त का चूल्हा जलते रहने के लिए ईंधन मांगता है. गुलज़ार साहब की कविता ईंधन उपलों की टेक लेकर बचपन ...
सदियों तक समाज से दूर रही आबादी को आज़ादी के बाद एकबारगी सभी के साथ, उसी रफ़्तार से चलने के ...
चाहे पेंच कसना हो या बातचीत, उसके साथ सहज रहना ज़रूरी है. पेंच को बेवजह कसने से उसकी चूड़ी मर ...
मां और बेटी दो अलग-अलग पीढ़ियों और सोच का प्रतिनिधित्व करती हैं. बावजूद एक समय के बाद हर बेटी अपनी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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