आंखों को इंतज़ार की भट्टी पे रख दिया: मुनव्वर राना की ग़ज़ल
कुछ ज़िंदगियों के मुक्कदर में दर्द ही दर्द होता है. ऐसे ही दर्द को समेटती है मुनव्वर राना की गज़ल....
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कुछ ज़िंदगियों के मुक्कदर में दर्द ही दर्द होता है. ऐसे ही दर्द को समेटती है मुनव्वर राना की गज़ल....
उस घटना का मार्मिक वर्णन जब 27 वर्ष की उम्र में लेखिका एक 18 साल की अनाथ और विधवा बालिका...
जो हमारे पास होता है, उस उससे ज़्यादा उस चीज़ को पाने की कामना करते हैं, जो हमारे पास नहीं...
अमूमन आम घरों में जब भी छोले बनते हैं, तरी यानी ग्रेवी वाले बनते हैं. पर यदि आप छोले का...
अच्छी नींद का आना हमें अगले दिन पूरे दिन के लिए ऊर्जावान बनाए रखता है. वहीं यदि एक रात भी...
हम अमूमन सजावटी सामान से अपने घर को सजाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पौधों से घरों को...
हमारे समाज की विसंगतियों, विडंबनाओं पर जिन लेखकों ने बेहिचक अपनी धारदार लेखनी चलाई उसमें हरिशंकर परसाई प्रमुख थे. भूख...
जिस तरह रंग हमारे मन को ख़ुश कर देते हैं. उसी तरह रंग-बिरंगे लिबास भी मन को प्रसन्न करते हैं....
बालों को स्ट्रेट रखने का चलन आज भी ट्रेंड में है. यदि आप उन लोगों में से हैं जो अपने...
नारी के हृदय की जटिलता को समझना दुनिया का सबसे मुश्क़िल काम है. एक पति द्वारा अपनी पत्नी पर शक़...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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